श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही SIT सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अंतरिम रिपोर्ट पेश कर सकती है। इस मामले में कई बड़े नामों के इस्तीफे और गिरफ्तारियां पहले ही हो चुकी हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • SIT सोमवार, 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपेगी।
  • श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान में कथित गबन की जांच जारी है।
  • जांच टीम को विस्तृत जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से और समय मांगा जा सकता है।
  • अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं और ट्रस्ट के पूर्व सचिव का इस्तीफा भी मिल चुका है।

अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान राशि के कथित गबन का मामला अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) सोमवार, 20 जुलाई को माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप सकती है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के निर्देश के बाद उठाया जा रहा है।

जांच का घटनाक्रम और अब तक की कार्रवाई

इस घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब SIT ने जून में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया और चपत लगाए गए नकदी की बरामदगी भी की। इस मामले ने ट्रस्ट के भीतर भी बड़ी हलचल पैदा कर दी है, जिसके परिणामस्वरूप पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा है।

SIT का गठन और जांच की जटिलता

उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। इस टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं। हालांकि जांच के लिए शुरू में 15 दिन का समय दिया गया था, लेकिन मामले की संवेदनशीलता और वित्तीय लेनदेन की जटिलता को देखते हुए इसे आगे बढ़ाया गया है। सूत्रों का कहना है कि SIT जांच को अंतिम रूप देने के लिए सरकार से अतिरिक्त समय की मांग कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट और भविष्य की राह

वर्तमान में, सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कई महत्वपूर्ण याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि इस मामले की जांच CBI द्वारा की जाए, एक विस्तृत फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए और CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) के माध्यम से ट्रस्ट के वित्त का ऑडिट सुनिश्चित किया जाए। आगामी 22 जुलाई को अयोध्या में होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इन निष्कर्षों और भविष्य के सुधारात्मक कदमों पर चर्चा की जाएगी, जिसमें दान गणना प्रणाली में बड़े बदलाव की संभावना है।