दिल्ली में चल रही विरोध प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तान समर्थित सोशल‑मीडिया हैंडल्स ने AI‑जनित झूठे वीडियो फैलाए। भारतीय सेना और PIB की फैक्ट‑चेक टीमों ने इन दावों को खारिज कर आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की।

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मुख्य बिंदु

  • पाकिस्तान‑समर्थित हैंडल्स ने AI‑आधारित फेक वीडियो वायरल किए
  • भारतीय सेना और PIB ने तथ्यों की पुष्टि कर झूठे दावों को खारिज किया
  • जनता से आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की गई

दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ और AI‑जनित डीपफेक वीडियो की बाढ़ देखी गई। ये सामग्री मुख्यतः रक्षा मंत्री, पूर्व सेना प्रमुख और एयर चेफ मार्शल के नाम पर बनाकर जनता को भ्रमित करने के इरादे से तैयार की गई थी।

भारतीय सेना की फैक्ट‑चेक यूनिट और PIB की जांच ने स्पष्ट किया कि इन वीडियो में मौलिक फुटेज को बदल कर नकली ऑडियो और झूठे कैप्शन जोड़े गए थे। उदाहरण के तौर पर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नाम पर जारी वीडियो में उन्होंने प्रदर्शनकारियों को ‘राज्य की पूरी ताकत’ इस्तेमाल करने की चेतावनी दी, जो पूरी तरह से झूठा था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछले कुछ वर्षों में भारत‑पाकिस्तान के बीच सूचना युद्ध की लहर देखी गई है, जहाँ दोनों पक्षों ने सोशल मीडिया का उपयोग करके विरोधी विचारधारा को फैलाया है। 2020 में कोविड‑19 महामारी के दौरान भी इसी तरह के फेक वीडियो भारत में व्यापक रूप से फैलाए गए थे, जिससे सार्वजनिक भ्रम बढ़ा था।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that coordinated disinformation campaigns aim to erode trust in democratic institutions during moments of civil unrest. By targeting high‑profile officials, the perpetrators seek to amplify fear and divert attention from genuine protest grievances.

"AI‑driven deepfakes are becoming a strategic tool for state‑backed propaganda, demanding vigilant fact‑checking by official agencies," says Dr. Ananya Rao, cyber‑security analyst.
Did You Know?: 2022 में भारत में सबसे अधिक फेक वीडियो ट्विटर पर वायरल हुए, जिनमें 70% से अधिक को AI‑सहायता प्राप्त थी।

Frequently Asked Questions

क्या भारतीय सेना ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया?
नहीं, इस दावे को सेना ने पूरी तरह झूठा बताया है; कानून व्यवस्था की देखरेख दिल्ली पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की है।

क्या दिल्ली में किसी की मौत की पुष्टि हुई है?
PIB ने स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस ने ऐसी कोई मौत नहीं बताई है; यह अफवाह केवल डर फैलाने के लिए फैलाई गई है।

Editor Comment: फेक न्यूज़ की तेज़ गति को रोकना अब केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता बन गई है। जब तक जनता आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता नहीं देती, तो ऐसे झूठे अभियानों को जड़ नहीं मिल पाएगी।