भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने नल्लामाला के जंगलों में 11वीं शताब्दी के एक महत्वपूर्ण तेलुगु शिलालेख को पढ़ने में सफलता प्राप्त की है। यह शिलालेख भूमि दान और धार्मिक परंपराओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।

मुख्य बातें

  • ASI के अभिलेख विभाग ने नल्लामाला वन में 11वीं सदी के तेलुगु शिलालेख को डिकोड किया।
  • यह शिलालेख मार्कपुरम जिले के सताकोडू गांव के पास पाया गया है।
  • अभिलेख में मंदिर पूजा के लिए भूमि दान का विवरण दिया गया है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अभिलेख विभाग ने शुक्रवार को एक बड़ी उपलब्धि की घोषणा की। विभाग ने नल्लामाला वन क्षेत्र में किए गए एक पुरालेख सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त 11वीं शताब्दी के तेलुगु शिलालेख को सफलतापूर्वक डिकोड कर लिया है। यह खोज दक्षिण भारत के प्राचीन इतिहास और सामाजिक संरचना को समझने में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

ASI मैसूर के निदेशक (अभिलेख), श्री के. मुनीरत्नम रेड्डी ने बताया कि यह शिलालेख मार्कपुरम जिले के येरागोण्डपलेम मंडल के सताकोडू गांव के पास से प्राप्त हुआ है। यह शिलालेख 11वीं शताब्दी ईस्वी की लिपि में लिखा गया है, जो उस काल की भाषाई और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।

ऐतिहासिक महत्व

अभिलेखों के विश्लेषण से पता चलता है कि यह शिलालेख तत्कालीन धार्मिक और आर्थिक व्यवस्था का जीवंत प्रमाण है। शिलालेख के अनुसार, मुट्टू मलारेडी नायका ने उत्तरायण संक्रांति के अवसर पर भगवान सप्तकोटीदेवर के मंदिर में पूजा आयोजित करने के लिए मुट्टुमालपाडु टैंक के पीछे स्थित वेटलैंड (गीली भूमि) के आठ 'पुतलू' और दो 'मट्टार' दान किए थे।

इसके अतिरिक्त, शिलालेख में प्रारलय पेग्गडा द्वारा उसी देवता को तीन 'खाडुका' भूमि दान करने का भी उल्लेख है। यह दर्शाता है कि मध्यकालीन समाज में धार्मिक संस्थानों को सहायता प्रदान करने की परंपरा कितनी गहरी थी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की खोजें न केवल क्षेत्रीय इतिहास को पुख्ता करती हैं, बल्कि प्राचीन भूमि प्रबंधन और कर प्रणालियों पर भी प्रकाश डालती हैं। यह शिलालेख सिद्ध करता है कि 11वीं शताब्दी में भी तेलुगु लिपि और प्रशासनिक शब्दावली काफी विकसित थी।

यह खोज नल्लामाला के जंगलों में छिपे हुए प्राचीन दक्षिण भारतीय साम्राज्यों के सामाजिक ताने-बाने को समझने के लिए एक नई खिड़की खोलती है।
क्या आप जानते हैं?: प्राचीन शिलालेखों में 'पुतलू' और 'खाडुका' जैसे शब्द भूमि माप की विशिष्ट इकाइयों को दर्शाते हैं, जो उस समय की सटीक कृषि अर्थव्यवस्था का प्रमाण हैं।

Frequently Asked Questions

1. यह शिलालेख कहाँ पाया गया है?
यह शिलालेख आंध्र प्रदेश के मार्कपुरम जिले में नल्लामाला वन के पास सताकोडू गांव में पाया गया है।

2. शिलालेख किस भाषा और काल का है?
यह 11वीं शताब्दी ईस्वी की तेलुगु लिपि में लिखा गया है।