भाजपा सांसद बैजयंत पांडा ने 'शील्ड बिल' (SHIELD Bill) पेश किया है, जिसका उद्देश्य बच्चों को सोशल मीडिया की लत और हानिकारक सामग्री से बचाना है। इस विधेयक में 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सख्त नियम प्रस्तावित हैं।
मुख्य बातें
- 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को माता-पिता की अनुमति के बिना सोशल मीडिया का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी।
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 'पैरेंटल कंट्रोल डैशबोर्ड' प्रदान करना अनिवार्य होगा।
- नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफार्मों पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लग सकता है।
- हानिकारक सामग्री को 24 से 36 घंटों के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।
नई दिल्ली में हाल ही में संसद के सत्र के दौरान, भाजपा सांसद बैजयंत पांडा ने एक महत्वपूर्ण निजी विधेयक, 'सेफगार्डिंग हेल्दी इंटरनेट एनवायरनमेंट्स फॉर लिटिल डिजिटल-नेटिव्स (Shield) बिल, 2025' सूचीबद्ध किया। यह विधेयक डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सोशल मीडिया एल्गोरिदम के दुष्प्रभावों से बचाना है। श्री पांडा के अनुसार, वर्तमान एल्गोरिदम न केवल लत लगाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, बल्कि वे बच्चों के मन में संकीर्ण और चरम विचार भी पैदा करते हैं। यह विशेष रूप से बढ़ते बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में बच्चों की इंटरनेट पहुंच तेजी से बढ़ रही है, जिससे साइबर बुलिंग और अनुचित सामग्री का जोखिम बढ़ गया है। यह विधेयक न केवल सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि इंटरमीडियरी (सोशल मीडिया कंपनियों) की जवाबदेही भी तय करता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि एक नियंत्रित वातावरण के रूप में देखा जाना चाहिए ताकि बच्चों का मानसिक विकास बाधित न हो।
विधेयक में सख्त दंड का प्रावधान है। यदि कोई कंपनी नियमों का पालन करने में विफल रहती है, तो उस पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर सेवाओं को पूरी तरह से ब्लॉक किया जा सकता है। इसके अलावा, सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को 3 साल तक की जेल भी हो सकती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
दुनिया भर में, ऑस्ट्रेलिया और कई यूरोपीय देशों ने पहले ही बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। भारत में भी केंद्र सरकार मेटा (Meta) जैसी कंपनियों के साथ डिजिटल सुरक्षा को लेकर चर्चा कर रही है, जिससे यह विधेयक और भी प्रासंगिक हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. यह बिल किस आयु वर्ग पर केंद्रित है? यह मुख्य रूप से 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की सुरक्षा के लिए है।
2. माता-पिता के पास क्या अधिकार होंगे? माता-पिता के पास 'पैरेंटल कंट्रोल डैशबोर्ड' के माध्यम से बच्चों की गतिविधि और स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने का अधिकार होगा।