उत्तर प्रदेश सरकार ज़ूनोटिक बीमारियों (जानवरों से इंसानों में फैलने वाली) की जल्द पहचान और रिपोर्टिंग के लिए 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण को मजबूत कर रही है। RISE GHS परियोजना के तहत प्रवासी पक्षियों में बर्ड फ्लू की निगरानी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
मुख्य बिंदु
- यूपी सरकार ज़ूनोटिक रोगों की जल्द पहचान के लिए 'वन हेल्थ' फ्रेमवर्क को लागू कर रही है।
- RISE GHS प्रोजेक्ट के तहत 19 रामसर साइट्स और आर्द्रभूमि स्थलों पर पक्षियों की निगरानी की गई।
- पशुपालन विभाग ने पशु चिकित्सकों के लिए एक विशेष 'कॉम्पेंडियम' (मार्गदर्शिका) विकसित की है।
- पीलीभीत और गोरखपुर में फार्म-स्तरीय बायोसिक्योरिटी को मजबूत किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य पालन विभाग ने ज़ूनोटिक रोगों (Zoonotic Diseases) की जल्द पहचान और रिपोर्टिंग की क्षमता को बढ़ाने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम (IAS) ने बताया कि राज्य सरकार 'वन हेल्थ' (One Health) दृष्टिकोण के माध्यम से उभरते स्वास्थ्य खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
RISE GHS प्रोजेक्ट और प्रवासी पक्षियों की निगरानी
RISE ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी (RISE GHS) परियोजना के अंतर्गत, पशुपालन विभाग ने वन और वन्यजीव विभाग के साथ मिलकर काम किया है। इस सहयोग के माध्यम से उत्तर प्रदेश के 19 रामसर स्थलों और अन्य महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि (wetlands) क्षेत्रों में जंगली प्रवासी पक्षियों के बीच एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) की सक्रिय निगरानी की गई। पिछले प्रवासी सत्र के दौरान, 1,100 से अधिक नमूने एकत्र किए गए थे जिनका परीक्षण IVRI, बरेली में किया गया था।
तकनीकी मजबूती और प्रशिक्षण
रोगों की सटीक पहचान के लिए, विभाग अब ELISA-आधारित परीक्षण के माध्यम से अपनी नैदानिक क्षमता को बढ़ा रहा है। इसके अतिरिक्त, पशु चिकित्सकों के लिए एक विशेष 'कॉम्पेंडियम' विकसित किया गया है, जो उन्हें प्राथमिकता वाले ज़ूनोटिक रोगों, मानक केस परिभाषाओं और समय पर रिपोर्टिंग के बारे में शिक्षित करेगा।
'वन हेल्थ' दृष्टिकोण के माध्यम से अंतर-विभागीय समन्वय ही भविष्य की महामारियों को रोकने की कुंजी है।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पीलीभीत और गोरखपुर जैसे जिलों में फार्म-स्तरीय बायोसिक्योरिटी पर ध्यान केंद्रित करना एक रणनीतिक कदम है, जो संक्रमण के प्रसार को शुरुआती स्तर पर ही रोकने में मदद करेगा। आगामी प्रवासी मौसम के दौरान भी राज्य के सभी महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि क्षेत्रों में इसी तरह की गहन निगरानी की जाएगी।
Frequently Asked Questions
1. 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण क्या है?
यह एक एकीकृत दृष्टिकोण है जो मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य को एक साथ जोड़कर बीमारियों के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करता है।
2. निगरानी कहाँ की जा रही है?
मुख्य रूप से यूपी के 19 रामसर स्थलों और महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि क्षेत्रों में प्रवासी पक्षियों की निगरानी की जा रही है।