केंद्र सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति जम्मू-कश्मीर में अनधिकृत बस्तियों और जनसांख्यिकीय बदलावों की जांच कर रही है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ की पहचान करना और सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करना है।

मुख्य बातें

  • रिटायर्ड जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नवलेकर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति का जम्मू-कश्मीर दौरा।
  • जम्मू संभाग के सीमावर्ती इलाकों में रोहिंग्या और बांग्लादेशी प्रवासियों की अनधिकृत बस्तियों की जांच।
  • अवैध प्रवासियों द्वारा राशन कार्ड और स्थायी निवासी प्रमाण पत्र के गलत इस्तेमाल का खुलासा।
  • प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषित 'डेमोग्राफी मिशन' के तहत यह बड़ी कार्रवाई।

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में हो रहे कथित जनसांख्यिकीय बदलावों (Demographic Changes) और उनके सुरक्षा निहितार्थों का मूल्यांकन करने के लिए एक उच्च स्तरीय पैनल तैनात किया है। यह चार सदस्यीय समिति, जिसका नेतृत्व सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलेकर कर रहे हैं, तीन दिवसीय दौरे पर जम्मू पहुंची है। इस दौरे के दौरान समिति ने मुख्य सचिव अटल डुल्लो और पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात के साथ महत्वपूर्ण बैठकें की हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह पैनल विशेष रूप से जम्मू संभाग के उन सीमावर्ती क्षेत्रों और इलाकों पर ध्यान केंद्रित करेगा जहाँ अवैध बस्तियों की खबरें मिली हैं। समिति वर्तमान सत्यापन प्रोटोकॉल की समीक्षा करेगी और अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए नए तंत्र तैयार करेगी। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले वर्ष घोषित उस मिशन का हिस्सा है जिसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में "अवैध घुसपैठ" को रोकना है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि रणनीतिक है। जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में अनुमानित 13,700 undocumented प्रवासियों की मौजूदगी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती हो सकती है। जब अवैध प्रवासी सरकारी दस्तावेजों जैसे राशन कार्ड प्राप्त कर लेते हैं, तो यह न केवल संसाधनों का दुरुपयोग है, बल्कि खुफिया एजेंसियों के लिए एक बड़ा सुरक्षा जोखिम भी बन जाता है।

"सीमावर्ती क्षेत्रों में अनियंत्रित जनसांख्यिकीय परिवर्तन राष्ट्रीय सुरक्षा के ढांचे को अस्थिर कर सकते हैं, जिससे सख्त सत्यापन प्रक्रिया अनिवार्य हो जाती है।"

हालिया घटनाओं ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। पिछले सप्ताह ही रामबन में कश्मीर घाटी की ओर जा रहे 21 कथित बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया था। अधिकारियों का दावा है कि कई रोहिंग्या प्रवासियों के पास राजस्व अधिकारियों द्वारा जारी किए गए राशन कार्ड और पुराने स्थायी निवासी प्रमाण पत्र पाए गए हैं, जो सिस्टम में बड़ी खामियों की ओर इशारा करते हैं।

क्या आप जानते हैं?: भारत में 'स्थायी निवासी प्रमाण पत्र' (PRC) पहले जम्मू-कश्मीर के निवासियों को विशेष अधिकार देने के लिए उपयोग किया जाता था, जिसे अब बदल दिया गया है।

Frequently Asked Questions

1. इस समिति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
समिति का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध बस्तियों की पहचान करना और जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करना है।

2. किन जिलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है?
मुख्य रूप से जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों के सीमावर्ती इलाकों की गहन जांच की जा रही है।