फुकेत‑दिल्ली के मार्ग पर एअर इंडिया की उड़ान में एक यात्री ने दावा किया कि पायलट नशे में दिख रहा था, जिससे सुरक्षा जांचों पर सवाल उठे हैं।
मुख्य बिंदु
- पायलट का व्यवहार असामान्य दिखा
- सुरक्षा जांचों में अनियमितता की आशंका
- प्राथमिक जांच में दवा परीक्षण की पुष्टि की जरूरत
फुकेत‑दिल्ली के बीच एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में अचानक गंभीर turbulence के कारण विमान लगभग 300 फुट नीचे गिरा, लेकिन सुरक्षित रूप से दिल्ली में लैंड कर सका।
उड़ान के दौरान एक यात्री, जयपुर के निवासी श्रीखंत झा, ने बताया कि पायलट की चाल ‘सही नहीं लग रही थी’ और turbulence के बाद उनकी आवाज़ में नशे जैसा असर था। उन्होंने इस अनुभव को ‘सिस्टमिक फेल्योर’ कहा और डेलि एयरपोर्ट अधिकारियों को औपचारिक शिकायत दर्ज की।
दूसरे यात्री रेणु रानीवाला ने भी कहा कि पायलट ‘सीधे नहीं चल रहा था’ और turbulence के दौरान बच्चों को चोट लगी। उन्होंने एयर इंडिया प्रबंधन पर ‘जिम्मेदारी न उठाने’ का आरोप लगाया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों में भारत में turbulence‑से जुड़ी कई घटनाएँ रिपोर्ट हुई हैं, जिनमें 2021 की एक एशियन एयरलाइन की turbulence‑से हुई दुर्घटना भी शामिल है, जिससे सुरक्षा मानकों पर पुनः विचार किया गया था।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that any hint of pilot impairment can erode public trust in aviation safety and may compel regulators like DGCA to tighten random drug‑testing protocols.
“Pilot intoxication, real or perceived, demands immediate, transparent investigation to safeguard passenger confidence,” says aviation safety expert Dr. Arvind Mehta.
Frequently Asked Questions
- क्या दोनों पायलटों को अभी तक डीड्रोस्टर किया गया है? – हाँ, DGCA ने जांच के दौरान दोनों पायलटों को डीड्रोस्टर कर दिया है।
- क्या एयर इंडिया ने दवा परीक्षण के परिणाम सार्वजनिक किए हैं? – नहीं, कंपनी ने कहा है कि परिणाम अभी तक साझा नहीं किए गए हैं।