संयुक्त राज्य के पेंटागन अधिकारी ने एशिया में अपने सहयोगियों को रक्षा खर्च को बढ़ाने के लिए कहा, ताकि चीन की बढ़ती आक्रामकता को रोका जा सके। यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

मुख्य बिंदु

  • पेंटागन ने एशियाई盟伙伴ों से रक्षा खर्च 2% जीडीपी तक बढ़ाने का आग्रह किया।
  • उद्देश्य चीन की संभावित सैन्य आक्रामकता को रोकना है।
  • जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और फ़िलिपींस प्रमुख लक्ष्य हैं।

संयुक्त राज्य के रक्षा विभाग के एक उच्च अधिकारी ने इस सप्ताह एशिया‑पैसिफिक क्षेत्र के सहयोगियों को सुरक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर चीन की सैन्य गतिविधियों को रोकना है तो सहयोगियों को अपने जीडीपी का कम से कम 2% रक्षा में निवेश करना चाहिए।

जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और फ़िलिपींस को विशेष रूप से लक्षित किया गया है, क्योंकि इन देशों की रणनीतिक स्थितियां चीन की विस्तारवादी नीतियों के मुकाबले महत्वपूर्ण हैं। पेंटागन ने कहा कि सामूहिक रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहेगी।

इतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछले दो दशकों में एशिया‑पैसिफिक में रक्षा खर्च में असमानता बनी रही है। 1990 के दशक के बाद से चीन ने अपने सैन्य बजट को दो गुना कर लिया है, जबकि कई अमेरिकी सहयोगियों ने अपने खर्च को स्थिर या घटा दिया है। इस असंतुलन ने अमेरिका को अपने साझेदारों से अधिक योगदान की मांग करने के लिए प्रेरित किया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that increased defense spending among Asian allies could shift the regional power balance, compelling China to reconsider its assertive maritime policies and reducing the likelihood of inadvertent conflicts.

"सुरक्षा खर्च में वृद्धि ही एशिया‑पैसिफिक में स्थिरता का प्रमुख स्तंभ है," कहा विशेषज्ञ डॉ. अनीता रॉय।
क्या आप जानते हैं?: 2020 में एशिया‑पैसिफिक के कुल रक्षा खर्च का केवल 12% ही अमेरिकी सहयोगियों द्वारा किया गया था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या सभी एशियाई देशों को 2% जीडीपी लक्ष्य पूरा करना अनिवार्य है?

उत्तर: यह एक लक्ष्य है, अनिवार्य नहीं, लेकिन पेंटागन इस दिशा में सहयोग की अपेक्षा रखता है।

प्रश्न 2: इस कदम से चीन के साथ संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर: अपेक्षित है कि यह तनाव को बढ़ाएगा, लेकिन साथ ही शांति के लिए कूटनीतिक संवाद को भी प्रोत्साहित करेगा।