केरल के मछुआरा समुदाय ने केंद्र सरकार के उन प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का संकल्प लिया है, जो राज्य के ब्लैक सैंड और समुद्री खनिज संसाधनों को निजी कंपनियों के लिए खोलने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्य बातें

  • केंद्र सरकार के नए खनिज कानून संशोधनों का मछुआरा समुदाय कड़ा विरोध कर रहा है।
  • केरल के तट पर 138 मिलियन टन ब्लैक सैंड है जिसमें कीमती खनिज मौजूद हैं।
  • मछुआरों का आरोप है कि यह 'ब्लू इकोनॉमी' नीति उनके आजीविका के लिए खतरा है।

केरल के मछुआरा समुदाय ने केंद्र सरकार के उस कदम के खिलाफ एक संयुक्त संघर्ष शुरू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत राज्य के समृद्ध ब्लैक सैंड (काली रेत) और अपतटीय खनिज संसाधनों को बड़े कॉर्पोरेट घरानों के लिए खोलने का प्रस्ताव है। केरल राज्य मछुआरा समन्वय समिति के अध्यक्ष और पूर्व सांसद टी.एन. प्रतापन ने इस कदम को तटीय अधिकारों पर सीधा हमला बताया है।

प्रतापन के अनुसार, 'खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957' में प्रस्तावित संशोधन निजी कंपनियों को खनिज निष्कर्षण में अधिक भागीदारी देने के उद्देश्य से लाए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रादेशिक जल (Territorial Waters) को अपतटीय क्षेत्रों के दायरे में शामिल किया गया, तो राज्य के तटों पर निजी खनन का दायरा अत्यधिक बढ़ जाएगा, जिससे पारंपरिक मछुआरों के जीवन पर संकट आ जाएगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संघर्ष केवल संसाधनों के लिए नहीं, बल्कि राज्य के अधिकारों और समुदायों की उत्तरजीविता के लिए है। केंद्र द्वारा प्रस्तावित 'ब्लू इकोनॉमी' नीति को मछुआरे अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान रहे हैं। यदि ये संशोधन लागू होते हैं, तो राज्य सरकार की निजी कंपनियों से सेस (Cess) और लेवी वसूलने की शक्ति भी कम हो सकती है।

केंद्र का यह कदम तटीय समुदायों की आजीविका और राज्य के प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण को सीधे तौर पर चुनौती दे रहा है।

केरल के तटीय जल में लगभग 138 मिलियन टन ब्लैक सैंड होने का अनुमान है। इसमें मोनाज़ाइट, इल्मेनाइट, सिलिमनाइट, रुटाइल, गार्नेट, मैग्नेटाइट और जिरकोन जैसे अत्यंत मूल्यवान खनिज शामिल हैं। इससे पहले कोल्लम तट के पास समुद्री तल की रेत खनन के प्रस्ताव को भी भारी विरोध के बाद वापस लेना पड़ा था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में खनिज संसाधनों के प्रबंधन को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच खींचतान लंबे समय से चली आ रही है। 2023 में 'ऑफशोर एरिया मिनरल (विकास और विनियमन) अधिनियम' में संशोधनों के बाद से ही कॉर्पोरेट दिग्गजों की दिलचस्पी महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा जैसे राज्यों के समुद्री क्षेत्रों में बढ़ी है।

क्या आप जानते हैं?: केरल की काली रेत में मौजूद खनिज दुनिया भर में उच्च तकनीक और परमाणु ऊर्जा उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: मछुआरे इस संशोधन का विरोध क्यों कर रहे हैं?
उत्तर: क्योंकि उन्हें डर है कि कॉर्पोरेट खनन से उनके मछली पकड़ने के क्षेत्रों में बाधा आएगी और उनकी आजीविका छिन जाएगी।

प्रश्न 2: ब्लैक सैंड में कौन से महत्वपूर्ण खनिज होते हैं?
उत्तर: इसमें मोनाज़ाइट, इल्मेनाइट, जिरकोन और मैग्नेटाइट जैसे कीमती खनिज पाए जाते हैं।