स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने राज्य में 'ईट राइट' अभियान की शुरुआत की है, जिसके तहत खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तालुक स्तर पर नागरिक टीमों का गठन किया जाएगा और शिकायतों के लिए QR कोड आधारित सिस्टम लॉन्च किया गया है।
- तालुक स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों और विशेषज्ञों की निगरानी टीमें गठित होंगी।
- पीजी (PG) और हॉस्टलों को स्वच्छता सुधारने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है।
- खाद्य और दवा सुरक्षा उल्लंघन की रिपोर्ट के लिए QR कोड आधारित प्रणाली शुरू।
- रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों के भोजन के नमूनों की लैब जांच होगी।
कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने सोमवार को बेंगलुरु में 'ईट राइट' (Eat Right) अभियान का शुभारंभ किया। इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य के नागरिकों के बीच स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि हर व्यक्ति को स्वच्छ और सुरक्षित भोजन मिले। मंत्री ने घोषणा की कि खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य के हर तालुक में नागरिक-नेतृत्व वाली निगरानी टीमें बनाई जाएंगी, जो सरकारी अधिकारियों के लिए 'फोर्स मल्टीप्लायर' के रूप में कार्य करेंगी।
इन निगरानी टीमों की संरचना काफी विस्तृत होगी। इनमें वरिष्ठ नागरिक, पूर्व खाद्य सुरक्षा अधिकारी और अनुभवी शेफ शामिल होंगे। इन सदस्यों को आधिकारिक पहचान पत्र (ID Card) जारी किए जाएंगे, जिससे वे विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर सकें। यदि निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार का उल्लंघन पाया जाता है, तो वे इसकी रिपोर्ट सीधे मुख्यालय को करेंगे, जिसके बाद त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार जल्द ही इन टीमों के संचालन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that by decentralizing food safety monitoring to the taluk level, the Karnataka government is effectively creating a community-driven surveillance model. This not only reduces the burden on the Food Safety and Drug Administration (FSDA) but also increases the accountability of small-scale food providers who often escape official radar. The inclusion of experienced chefs ensures that technical standards are met, while senior citizens provide a layer of social trust.
"Integrating citizens into the regulatory framework of food safety transforms the public from passive consumers into active guardians of public health."
निरीक्षण का दायरा अब केवल होटलों और ढाबों तक सीमित नहीं रहेगा। मंत्री खादर ने विशेष रूप से पेइंग गेस्ट (PG) आवासों पर ध्यान केंद्रित किया है, जहाँ बड़ी संख्या में छात्र और कामकाजी महिलाएं रहती हैं। उन्होंने कहा कि अस्वास्थ्यकर भोजन के कारण युवाओं का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। सरकार ने पीजी और अन्य निजी छात्रावासों को अपनी कमियों को सुधारने के लिए 10 दिनों का समय दिया है, जिसके बाद उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और विमानों में परोसे जाने वाले भोजन के नमूनों को लैब विश्लेषण के लिए एकत्र किया जाएगा।
सरकार ने स्टार होटलों के मालिकों के साथ भी संवाद करने की योजना बनाई है ताकि अर्थव्यवस्था में उनके योगदान को स्वीकार करते हुए उन्हें सुरक्षा मानकों में भागीदार बनाया जा सके। इसके अलावा, केंद्र सरकार और अन्य राज्यों के अधिकारियों के साथ एक 'खाद्य सुरक्षा कॉन्क्लेव' का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आयातित चॉकलेट और मांस की खपत के मानकों पर गहन चर्चा होगी।
तकनीकी हस्तक्षेप की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, सरकार ने एक QR कोड-आधारित शिकायत प्रबंधन प्रणाली लॉन्च की है। अब नागरिक किसी भी दवा या खाद्य सुरक्षा उल्लंघन की रिपोर्ट सीधे QR कोड स्कैन करके कर सकते हैं। अधिकारियों द्वारा इन शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर और समर्पित कॉल सेंटर भी स्थापित किया जाएगा।
Frequently Asked Questions
1. नागरिक निगरानी टीमों में कौन शामिल हो सकता है?
इन टीमों में वरिष्ठ नागरिक, पूर्व खाद्य सुरक्षा अधिकारी और अनुभवी शेफ शामिल होंगे।
2. पीजी (PG) संचालकों के लिए क्या निर्देश हैं?
पीजी और हॉस्टलों को खाद्य सुरक्षा मानकों को ठीक करने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है, अन्यथा उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।