मणिपुर में छात्रों के नेतृत्व में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है, जिसमें 2027 की जनगणना शुरू होने से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने की मांग को लेकर दो दिवसीय आम हड़ताल का आह्वान किया गया है।
- 'जस्ट एंड फेयर डेलिमिटेशन (JFD) स्टूडेंट विंग' ने 17 अगस्त से दो दिवसीय आम हड़ताल का आह्वान किया है।
- प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुरू होने से पहले NRC को पूरा किया जाए।
- DM यूनिवर्सिटी में छात्रों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए।
- ख्वैराम्बंद केइथेल सहित प्रमुख व्यापारिक केंद्र इस विरोध के समर्थन में बंद रहे।
मणिपुर राज्य में नागरिक अशांति बढ़ गई है क्योंकि 'कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डेलिमिटेशन (JFD) स्टूडेंट विंग' ने दो दिवसीय आम हड़ताल की घोषणा की है। इस आंदोलन का मुख्य केंद्र एक महत्वपूर्ण मांग है: 2027 की जनगणना प्रक्रिया शुरू होने से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का कार्यान्वयन। यह समय अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि जनगणना 2027 का हाउस-लिस्टिंग चरण 17 अगस्त से शुरू होना था।
इम्फाल घाटी के बड़े हिस्से में विरोध प्रदर्शनों ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है। यूनाइटेड मेइतेई नागा कमेटी और फेडरेशन ऑफ नागा सिविल सोसाइटी (FNCC) सहित विभिन्न नागरिक समाज संगठनों ने इस बहिष्कार में साथ दिया है। इसका आर्थिक प्रभाव राज्य के सबसे बड़े वाणिज्यिक केंद्र, ख्वैराम्बंद केइथेल में देखा गया, जो महिलाओं के बाजारों द्वारा आयोजित सार्वजनिक बैठकों के बाद पूरी तरह बंद रहा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल डेटा संग्रह को लेकर एक प्रक्रियात्मक विवाद नहीं है, बल्कि जनसांख्यिकीय बदलावों और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर गहरी चिंता है। जातीय तनावों से जूझ रहे इस क्षेत्र में, 1951 को आधार वर्ष मानकर NRC की मांग यह दर्शाती है कि लोगों को डर है कि जनगणना अवैध प्रवासियों की उपस्थिति को औपचारिक रूप दे देगी, जिससे राज्य का राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप बदल जाएगा।
DM यूनिवर्सिटी परिसर में तब हिंसा भड़क उठी जब छात्रों ने DM कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन में जनगणना से संबंधित प्रशिक्षण को रोकने की कोशिश की। पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कम से कम दो छात्र घायल हो गए। साथ ही, ऑल मणिपुर स्टूडेंट्स यूनियन (AMSU) ने भारत और म्यांमार के बीच संभावित लैंड स्वैप (भूमि विनिमय) की खबरों पर चिंता जताई है।
सीमावर्ती राज्यों में नागरिकता दस्तावेज़ीकरण और जनसंख्या गणना का मेल अक्सर प्रशासनिक कार्यों को पहचान की राजनीति के संघर्ष में बदल देता है।
JFD का तर्क है कि जब तक अवैध प्रवासियों की सही पहचान नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार की जनगणना गतिविधि समय से पहले है। उनका मानना है कि बिना NRC के, जनगणना के परिणाम त्रुटिपूर्ण होंगे और स्वदेशी आबादी का सही प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: छात्र जनगणना से पहले NRC क्यों चाहते हैं?
उनका मानना है कि अवैध प्रवासियों की पहचान से पहले जनगणना करने से गैर-नागरिक आधिकारिक जनसंख्या गणना में शामिल हो जाएंगे, जिससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा।
प्रश्न 2: इस हड़ताल का समर्थन कौन से संगठन कर रहे हैं?
इस हड़ताल को JFD स्टूडेंट विंग, AMSU, यूनाइटेड मेइतेई नागा कमेटी, FNCC और नेटिव पीपल्स कमेटी मणिपुर का समर्थन प्राप्त है।