अमरावती के नवलुरु गांव में 33 भूखंड स्वामियों के बीच चल रहे भूमि विवाद को सुलझाने के लिए 'सेंटर फॉर लिबर्टी' ने सरकार और APCRDA से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ब्रिटिश काल के भूमि रिकॉर्ड्स और वर्तमान बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बीच फंसा यह मामला अब कानूनी और प्रशासनिक उलझनों में है।

  • नवलुरु के 33 भूखंड मालिक भूमि विवाद के कारण संकट में हैं।
  • सेंटर फॉर लिबर्टी ने सरकार और APCRDA से मामले के त्वरित समाधान की अपील की है।
  • विवाद का मुख्य कारण ब्रिटिश काल के भूमि वर्गीकरण और वर्तमान सड़क निर्माण परियोजना है।
  • सरकार प्रभावितों को वैकल्पिक भूमि देने पर विचार कर रही है।

अमरावती के मंगलगिरी मंडल के अंतर्गत आने वाले नवलुरु गांव में भूमि विवाद का मामला गहराता जा रहा है। 'सेंटर फॉर लिबर्टी' के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त IPS अधिकारी ए.बी. वेंकटेश्वर राव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को विजयवाड़ा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य सरकार और आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (APCRDA) से इस विवाद को सुलझाने का आग्रह किया।

मामले की जटिलता ऐतिहासिक भूमि रिकॉर्ड्स से जुड़ी है। श्री राव का दावा है कि ये भूमि मूल रूप से ब्रिटिश काल के दौरान किसानों को आवंटित की गई थी। रिकॉर्ड के अनुसार, 1907 में इस भूमि को 'टैंक पोरोम्बोक' (Tank Poramboke) के रूप में दर्ज किया गया था और 1925 में इसे सात उप-विभाजनों में बांटा गया था, जिसमें से एक 'वागु पोरोम्बोक' (Vagu Poramboke) के रूप में वर्गीकृत था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और कानूनी संघर्ष

विवाद की जड़ें तब और गहरी हो गईं जब लाभार्थियों ने ग्राम पंचायत से लेआउट के लिए अनुमति प्राप्त की और विकसित भूखंडों को बेच दिया। हालांकि, 2007 में राज्य सरकार ने इन जमीनों को 22A प्रतिबंधित संपत्तियों की सूची में शामिल कर दिया। इसके बाद से, प्रभावित पक्ष और सरकार के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है।

वर्ष 2017 में, गुंटूर जिला कलेक्टर ने इन आवंटित जमीनों को सरकारी भूमि मानकर APCRDA को हस्तांतरित कर दिया। अब, APCRDA इस क्षेत्र से N3(B) सड़क का निर्माण कर रहा है, जिससे सीधे तौर पर 33 भूखंड प्रभावित हो रहे हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत भूमि विवाद नहीं है, बल्कि यह शहरी विकास और ऐतिहासिक भूमि अधिकारों के बीच के टकराव का एक गंभीर उदाहरण है। यदि सरकार समय रहते समाधान नहीं निकालती है, तो यह बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी और बड़े पैमाने पर नागरिक असंतोष का कारण बन सकता है।

भूमि अधिकारों और आधुनिक शहरी नियोजन के बीच का यह संघर्ष कानूनी जटिलताओं का एक बड़ा जाल बुन रहा है।

राजस्व अधिकारियों का कहना है कि ये भूमि क्षेत्र APCRDA की मुख्य बुनियादी ढांचा विकास योजनाओं का हिस्सा है। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि सरकार प्रभावित भूखंड स्वामियों को वैकल्पिक भूमि आवंटित करने पर विचार कर रही है।

Did You Know?: 'पोरोम्बोक' शब्द का उपयोग भारत में सरकारी भूमि के वर्गीकरण के लिए किया जाता है, जिसका इतिहास औपनिवेशिक काल से जुड़ा है।

Frequently Asked Questions

1. विवाद का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण ब्रिटिश काल के भूमि रिकॉर्ड और वर्तमान में APCRDA द्वारा बनाई जा रही N3(B) सड़क का निर्माण है।

2. सरकार का इस पर क्या रुख है?
सरकार इन जमीनों को बुनियादी ढांचे के लिए आवश्यक मान रही है और प्रभावितों को वैकल्पिक भूमि देने पर विचार कर रही है।