ऋषिकेश में जलभराव वाली सड़क पर बिजली की तार टूटने से 32 वर्षीय महिला और उसकी दो साल की बेटी की करंट लगने से मौत हो गई। मरते समय मां ने अपनी सूझबूझ से 12 वर्षीय बेटे को दूर रहने की चेतावनी देकर उसकी जान बचा ली।
- ऋषिकेश में करंट लगने से 32 वर्षीय महिला और उसकी 2 वर्षीय बेटी की मृत्यु।
- भारी बारिश के कारण लो-टेंशन बिजली लाइन टूटकर जलभराव वाली सड़क पर गिरी।
- UPCL ने जूनियर इंजीनियर को निलंबित किया और राज्यव्यापी सुरक्षा ऑडिट का आदेश दिया।
- भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पवित्र नगरी ऋषिकेश में रविवार की शाम एक हृदयविदारक घटना घटी। भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण एक लो-टेंशन बिजली की तार टूटकर सड़क पर जमा पानी में गिर गई। इस हादसे में 32 वर्षीय सुमन जेठुड़ी और उनकी दो साल की बेटी सृष्टि की करंट लगने से मौके पर ही मौत हो गई।
इस त्रासदी के बीच ममता की एक मिसाल भी देखने को मिली। सुमन ने अपनी अंतिम सांसें लेते हुए अपने 12 वर्षीय बेटे को पानी से दूर रहने का इशारा किया, जिससे उसकी जान बच गई। यह घटना क्षेत्र में बिजली विभाग की लापरवाही को उजागर करती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे की विफलता है। स्थानीय निवासी पिछले एक साल से 'एरियल बंचिंग केबल्स' (इंसुलेटेड तार) लगाने की मांग कर रहे थे। यदि विभाग ने समय रहते इन तारों को बदला होता, तो इस भीषण त्रासदी को टाला जा सकता था।
"मानसून प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की लापरवाही सार्वजनिक सड़कों को मौत के जाल में बदल देती है; इंसुलेटेड केबलिंग अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है।"
घटना के बाद उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने सख्त कदम उठाए हैं। प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद्र ध्यानी ने रायवाला वितरण उपखंड के जूनियर इंजीनियर शंभू प्रसाद बहुगुणा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही, मामले की जांच के लिए मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारियों की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।
मृतका के पति हरपाल सिंह जेठुड़ी ने UPCL के अधिशासी अभियंता शक्ति प्रसाद और उप-मंडल अभियंता शशिकांत सिंह सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। स्थानीय नेता पुष्पा रावत ने परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है और इसे विभागीय लापरवाही का स्पष्ट मामला बताया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान बिजली लाइनों का टूटना एक आम समस्या रही है। पुराने लो-टेंशन (LT) तार हवा और बारिश के दबाव को नहीं झेल पाते, जिससे करंट लीक होने का खतरा बढ़ जाता है। राज्य सरकार और UPCL धीरे-धीरे आधुनिक केबलिंग की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में यह प्रक्रिया अत्यंत धीमी है।
| विशेषता | पारंपरिक LT लाइनें | एरियल बंचिंग केबल्स (ABC) |
|---|---|---|
| इंसुलेशन | बिना इंसुलेशन के (नंगे तार) | पूरी तरह इंसुलेटेड |
| सुरक्षा जोखिम | उच्च (करंट लीक का खतरा) | कम (सुरक्षित) |
| मौसम प्रतिरोध | हवा में टूटने की संभावना अधिक | मौसम के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 क्या है?
यह धारा लापरवाही से मौत का कारण बनने से संबंधित है, जो तब लागू होती है जब किसी व्यक्ति की लापरवाही से किसी अन्य की मृत्यु हो जाती है।
एरियल बंचिंग केबल्स क्या होते हैं?
ये विशेष इंसुलेटेड तार होते हैं जो बिजली को वातावरण में लीक होने से रोकते हैं, जिससे बारिश के दौरान करंट लगने का खतरा न्यूनतम हो जाता है।