ओडिशा के बोलांगिर में 2.7 करोड़ रुपये के कथित 'हनुमान पैसे' (प्राचीन सिक्के) के विवाद ने एक 62 वर्षीय होटल व्यवसायी के अपहरण का रूप ले लिया। इस मामले में एक महिला पुलिस सब-इंस्पेक्टर और एक पत्रकार सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
- महिला SI और पत्रकार सहित चार लोग अपहरण के आरोप में गिरफ्तार।
- विवाद 2.7 करोड़ रुपये के 'हनुमान पैसे' नामक प्राचीन सिक्के को लेकर था।
- पीड़ित से 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई और उसके साथ मारपीट की गई।
ओडिशा के बोलांगिर जिले में लालच और अंधविश्वास की एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने कानून व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। 62 वर्षीय होटल व्यवसायी नरेंद्र साहू का अपहरण किया गया, जिसका मुख्य कारण 2.7 करोड़ रुपये का एक कथित प्राचीन सिक्का था, जिसे 'हनुमान पैसा' कहा जाता है।
पुलिस के अनुसार, नरेंद्र साहू का 14 अगस्त को बंदूक की नोक पर अपहरण किया गया और उन्हें भुवनेश्वर ले जाया गया। वहां उन्हें एक होटल में बंधक बनाकर रखा गया, उनके साथ मारपीट की गई और उनसे 50 लाख रुपये की जबरन वसूली करने की कोशिश की गई।
क्या है 'हनुमान पैसा' विवाद?
इस पूरे मामले की जड़ 2020 के एक लेन-देन में छिपी है। मुख्य आरोपी क्षितिष चंद्र साहू ने जांच अधिकारियों को बताया कि उसने इस प्राचीन सिक्के के लिए नरेंद्र साहू को लगभग 2.7 करोड़ रुपये दिए थे। क्षितिष का दावा है कि उसे न तो सिक्का मिला और न ही उसके पैसे वापस किए गए, हालांकि पीड़ित ने इन आरोपों से पूरी तरह इनकार किया है।
खाकी पर दाग: पुलिस अधिकारी की संलिप्तता
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पुलिस ने पाया कि मुख्य आरोपी की बहन स्नेहमंजरी साहू, जो खंडगिरी पुलिस स्टेशन में सब-इंस्पेक्टर (SI) के पद पर तैनात है, इस साजिश में शामिल थी। आरोप है कि महिला अधिकारी ने पीड़ित को धमकी दी कि यदि उसने 24 घंटे के भीतर 50 लाख रुपये नहीं दिए, तो उसके खिलाफ झूठा आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।
जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल अपहरण और ब्लैकमेलिंग के लिए हो, तो यह समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
इसके अलावा, भुवनेश्वर के एक पत्रकार संजय जेना ने कथित तौर पर पुलिस अधिकारी का रूप धारण किया और पीड़ित को झांसा देकर खंडगिरी पुलिस स्टेशन ले गया। इस पूरी साजिश का पर्दाफाश तब हुआ जब पीड़ित के परिवार ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई और पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए उनकी गाड़ी को ट्रैक किया।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह घटना दर्शाती है कि कैसे अंधविश्वास (हनुमान पैसे की अलौकिक शक्ति का विश्वास) और प्रशासनिक भ्रष्टाचार मिलकर एक खतरनाक अपराध को जन्म देते हैं। एक पुलिस अधिकारी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करना न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को कम करता है।
गिरफ्तारियों का सिलसिला तब शुरू हुआ जब क्षितिष और उसका सहयोगी संजीव बेहरा खुद पुलिस स्टेशन पहुंचे ताकि पीड़ित के खिलाफ एक झूठी शिकायत दर्ज कराकर उसे फंसा सकें। तभी एक विशेष पुलिस दस्ते ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: इस मामले में किन लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने क्षितिष चंद्र साहू, उसकी बहन स्नेहमंजरी साहू (SI), पत्रकार संजय जेना और संजीव बेहरा को गिरफ्तार किया है।
प्रश्न 2: व्यवसायी को कैसे बचाया गया?
परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की और भुवनेश्वर की ओर जा रही उनकी गाड़ी का पीछा कर उन्हें मुक्त कराया।