तमिलनाडु पुलिस की 'आइडल विंग' ने ब्रिटेन के आश्रमियन संग्रहालय से तिरुमंगई अलवार की चोरी हुई प्राचीन मूर्ति को सफलतापूर्वक बरामद कर लिया है। यह मूर्ति लगभग 70 वर्षों से लापता थी और इसे कुंभकोणम के श्री सौन्दर्ाराज पेरुमल मंदिर से चुराया गया था।
- ब्रिटेन के आश्रमियन संग्रहालय से तिरुमंगई अलवार की कांस्य मूर्ति बरामद की गई।
- मूर्ति को 1957 और 1967 के बीच कुंभकोणम के मंदिर से चोरी किया गया था।
- तमिलनाडु पुलिस की 'आइडल विंग-सीआईडी' ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह सफलता हासिल की।
- मूर्ति को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को सौंपा गया और फिर मंदिर में स्थापित किया गया।
लगभग सात दशकों के लंबे इंतजार और अनिश्चितता के बाद, कुंभकोणम के श्री सौन्दर्ाराज पेरुमल मंदिर से चोरी हुई तिरुमंगई अलवार की प्राचीन कांस्य मूर्ति आखिरकार अपने मूल स्थान पर लौट आई है। तमिलनाडु पुलिस की विशेष 'आइडल विंग-सीआईडी' ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए इस मूर्ति को यूनाइटेड किंगडम के ऑक्सफोर्ड स्थित आशमोलेन संग्रहालय से बरामद किया है।
इस मामले की जड़ें दशकों पुरानी हैं। 12 फरवरी, 2020 को, मंदिर के कार्यकारी अधिकारी की शिकायत पर एक मामला दर्ज किया गया था, जिसमें बताया गया था कि 1957 और 1967 के बीच मंदिर से चार महत्वपूर्ण मूर्तियां चोरी हो गई थीं। इनमें तिरुमंगई अलवार की कांस्य प्रतिमा के साथ-साथ कालिंग नर्तना कृष्णर, विष्णु और श्रीदेवी की धातु की मूर्तियां शामिल थीं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक मूर्ति की वापसी नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और चोरी की गई कलाकृतियों की पुनर्प्राप्ति के लिए एक वैश्विक मिसाल है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे आधुनिक वैज्ञानिक जांच और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से दशकों पुराने अपराधों को सुलझाया जा सकता है।
यह जीत भारत की खोई हुई सांस्कृतिक पहचान को वापस पाने की दिशा में एक मील का पत्थर है।
जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कल्पना नायक ने बताया कि अधिकारियों ने वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए जिससे यह साबित हो गया कि ये मूर्तियां अवैध रूप से तस्करी कर विदेश भेजी गई थीं। आश्रमियन संग्रहालय ने भी जांच के बाद स्वीकार किया कि मूर्ति को अवैध रूप से मंदिर से हटाया गया था।
पुनर्प्राप्ति की प्रक्रिया जटिल थी। 2024 में विश्वविद्यालय ने मूर्ति वापस करने की प्रतिबद्धता जताई, जिसके बाद भारत सरकार और तमिलनाडु सरकार ने मिलकर काम किया। एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, मूल मूर्ति के बदले संग्रहालय को एक प्रतिकृति (replica) भेजने की व्यवस्था भी की गई ताकि सांस्कृतिक आदान-प्रदान बना रहे।
मूर्ति को नई दिल्ली में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा प्राप्त करने के बाद चेन्नई लाया गया। सोमवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के समक्ष इसे प्रस्तुत किया गया। इसके बाद, मंगलवार को कुंभकोणम न्यायालय के माध्यम से मूर्ति को मंदिर के संरक्षकों को सौंप दिया गया, जहां भव्य जुलूस के साथ स्थानीय निवासियों ने इसका स्वागत किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
दक्षिण भारत के मंदिरों में मूर्तिकला का इतिहास अत्यंत समृद्ध है। चोल और पल्लव काल की कांस्य मूर्तियां विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं। 20वीं सदी के मध्य में, कई मंदिरों से कीमती कलाकृतियां चोरी कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेच दी गईं, जिससे भारत की सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति हुई।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. यह मूर्ति कहाँ से चोरी हुई थी?
यह मूर्ति तमिलनाडु के कुंभकोणम स्थित श्री सौन्दर्ाराज पेरुमल मंदिर से चोरी हुई थी।
2. मूर्ति को कहाँ से बरामद किया गया?
इसे यूनाइटेड किंगडम के ऑक्सफोर्ड स्थित आश्रमियन संग्रहालय से बरामद किया गया है।