विशाखापत्तनम मेट्रो रेल परियोजना के महत्वाकांक्षी डबल-डेकर हिस्से को तकनीकी कारणों से काफी छोटा कर दिया गया है। जो योजना 20 किमी की थी, उसे अब केवल 2.1 किमी तक सीमित कर दिया गया है।

  • डबल-डेकर ट्रैक की लंबाई 20 किमी से घटकर अब केवल 2.1 किमी रह गई है।
  • यह नया कॉरिडोर हनुमानथवाका और गुरुद्वारा के बीच केंद्रित होगा।
  • RITES की तकनीकी सिफारिशों के बाद यह बड़ा बदलाव किया गया है।

विशाखापत्तनम में आधुनिक रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की तैयारी के बीच एक बड़ा मोड़ आया है। विजाग मेट्रो रेल (VMR) के बहुचर्चित डबल-डेकर घटक के ब्लूप्रिंट में विशेषज्ञों की सुरक्षा और व्यवहार्यता समीक्षा के बाद भारी कटौती की गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इंजीनियरिंग वास्तविकताओं और यातायात पैटर्न को देखते हुए इस महत्वाकांक्षी योजना को काफी छोटा कर दिया गया है।

योजना में आए बड़े बदलाव

जब इस शहरी ट्रांजिट परियोजना की कल्पना की गई थी, तब आंध्र प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने 76 किमी की कुल रेल लंबाई के साथ 20 किमी के विशाल डबल-डेकर वायाडक्ट का प्रस्ताव रखा था। इस योजना में एक चार-लेन सड़क फ्लाईओवर के ऊपर लाइट मेट्रो रेल ट्रैक चलाने का विचार था। हालांकि, यातायात घनत्व सर्वेक्षणों के बाद, परामर्शदाता फर्म RITES ने सुझाव दिया कि 13 किमी का एकीकृत हिस्सा पर्याप्त होगा। अब, नवीनतम समीक्षा में इस 13 किमी के प्रस्ताव को भी घटाकर मात्र 2.1 किमी कर दिया गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के बड़े बदलाव अक्सर बुनियादी ढांचे की लागत को नियंत्रित करने और निर्माण के दौरान होने वाली बाधाओं को कम करने के लिए किए जाते हैं। हनुमानथवाका और गुरुद्वारा के बीच के इस 2.1 किमी के संकीर्ण कॉरिडोर पर ध्यान केंद्रित करने का उद्देश्य सबसे बड़े ट्रैफिक बॉटलनेक (जाम वाले क्षेत्र) को हल करना है।

तकनीकी व्यवहार्यता और लागत प्रभावशीलता के बीच संतुलन बनाना किसी भी बड़े मेट्रो प्रोजेक्ट की सफलता की कुंजी है।

विशाखापत्तनम मेट्रो रेल पहल का व्यापक लक्ष्य औद्योगिक केंद्रों, आवासीय क्षेत्रों और वाणिज्यिक क्षेत्रों को जोड़ना है। सरकार का उद्देश्य राजमार्ग फ्लाईओवरों के साथ मेट्रो ट्रैक को जोड़कर शहरी भूमि की बचत करना और संपत्ति अधिग्रहण की समस्या को कम करना है।

परियोजना का विस्तृत विवरण

मेट्रो का चरण-1 और चरण-2 कुल 76.7 किमी तक फैलने की योजना है। चरण-1 के तहत 46.23 किमी का नेटवर्क शामिल है, जिसमें स्टील प्लांट जंक्शन से कोमडी तक 34.40 किमी, गुरुद्वारा से पुराने पोस्ट ऑफिस जंक्शन तक 5.08 किमी, और थैटिचेटलापलेम से चिन्ना वाल्टेयर तक 6.75 किमी के मार्ग शामिल हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट में 42 स्टेशन होंगे और अनुमानित निवेश ₹11,400 करोड़ से अधिक है।

Did You Know?: डबल-डेकर मेट्रो का मतलब है एक ही खंभे पर सड़क और रेल दोनों का होना, जिससे जमीन की बचत होती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: नया डबल-डेकर कॉरिडोर कहाँ स्थित होगा?
उत्तर: नया प्रस्तावित 2.1 किमी का डबल-डेकर कॉरिडोर हनुमानथवाका और गुरुद्वारा के बीच होगा।

प्रश्न 2: इस कटौती का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: RITES द्वारा की गई तकनीकी समीक्षा, सुरक्षा मानक और इंजीनियरिंग व्यवहार्यता इस कटौती के मुख्य कारण हैं।