अलीगढ़ में 3.8 हेक्टेयर की बेशकीमती जमीन को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) और नगर निगम के बीच जबरदस्त टकराव शुरू हो गया है। दोनों संस्थान इस जमीन पर अपना दावा ठोक रहे हैं, जिसके बाद जिलाधिकारी ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

  • ₹500 करोड़ की कीमत वाली 3.86 हेक्टेयर जमीन पर स्वामित्व का विवाद।
  • नगर निगम का दावा है कि जमीन 1992 से 'बंजर भूमि' के रूप में दर्ज है।
  • AMU का तर्क है कि जमीन 1925 से विश्वविद्यालय की संपत्ति है।
  • जिलाधिकारी ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए यथास्थिति (Status Quo) का आदेश दिया है।

अलीगढ़ में एक बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। शहर के प्राइम लोकेशन पर स्थित लगभग 3.86 हेक्टेयर जमीन, जिसकी बाजार में कीमत लगभग ₹500 करोड़ आंकी जा रही है, अब दो सरकारी संस्थानों के बीच युद्ध का मैदान बन गई है। एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन अलीगढ़ नगर निगम है, तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार द्वारा संचालित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU)।

विवाद तब और गहरा गया जब गुरुवार को नगर निगम के अधिकारियों ने जमीन को समतल करने के लिए मशीनें तैनात कीं और चारों ओर बाड़ लगानी शुरू कर दी। इस कार्रवाई का विरोध करने के लिए स्वयं AMU की कुलपति नाइमा खातून मौके पर पहुंचीं। शुक्रवार को स्थिति को बिगड़ते देख जिलाधिकारी अविनाश ने हस्तक्षेप किया और मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि दो अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड्स के बीच का टकराव है। यदि नगर निगम इस पर कब्जा कर लेता है, तो वह यहाँ पुलिस स्टेशन, स्कूल, अस्पताल और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जैसे सार्वजनिक प्रोजेक्ट्स विकसित करना चाहता है। वहीं, AMU का दावा है कि यह उनकी ऐतिहासिक 'हॉर्स राइडिंग फील्ड' है।

"यह विवाद सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर और प्रशासनिक तालमेल की कमी का एक गंभीर उदाहरण है जो भविष्य में बड़े कानूनी पेच पैदा कर सकता है।"

नगर निगम के आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने इस कार्रवाई को 'ऐतिहासिक' बताते हुए कहा कि यह जमीन 1992 से राजस्व रिकॉर्ड में 'बंजर भूमि' के रूप में दर्ज है। उनके अनुसार, नगर निगम के पास ऐसी बंजर भूमि का उपयोग करने का कानूनी अधिकार है।

दूसरी ओर, AMU का पक्ष बेहद मजबूत और ऐतिहासिक है। कुलपति नाइमा खातून ने कहा कि विश्वविद्यालय के पास 1925 के लैंड एक्विजिशन एक्ट और 1940 के गवर्नर के आदेशों के दस्तावेज़ मौजूद हैं। विश्वविद्यालय का आरोप है कि 1992 में बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के राजस्व रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की गई थी।

तथ्यनगर निगम का दावाAMU का दावा
स्वामित्व का आधार1992 के राजस्व रिकॉर्ड (बंजर भूमि)1925 का लैंड एक्विजिशन एक्ट
भूमि का उपयोगस्कूल, अस्पताल, पुलिस स्टेशनहॉर्स राइडिंग फील्ड
कानूनी स्थितिनगर निगम का अधिकार क्षेत्रकेंद्र सरकार की संपत्ति

AMU ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाएंगे। विश्वविद्यालय का कहना है कि उन्होंने 2003 से ही रिकॉर्ड सुधारने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी और मार्च 2025 में भी इसके लिए आवेदन किया था, जो अभी भी एसडीएम के पास लंबित है।

Did You Know?: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की यह विवादित जमीन ऐतिहासिक रूप से विश्वविद्यालय के घुड़सवारी अभ्यास (Riding Field) के लिए उपयोग की जाती रही है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: विवादित जमीन की कीमत कितनी है?
उत्तर: इस 3.86 हेक्टेयर जमीन की अनुमानित कीमत लगभग ₹500 करोड़ है।

प्रश्न 2: वर्तमान में जमीन की स्थिति क्या है?
उत्तर: जिलाधिकारी के आदेश के बाद फिलहाल जमीन पर यथास्थिति (Status Quo) लागू है।