असम सरकार काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के महत्वपूर्ण पशु गलियारों (एनिमल कॉरिडोर्स) में अवैध निर्माण गतिविधियों की जानकारी देने में पूरी तरह विफल रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल के बार-बार याद दिलाने के बाद भी राज्य प्रशासन ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे पर्यावरणविदों में भारी आक्रोश है।

  • सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) ने असम सरकार से काजीरंगा के 9 पशु गलियारों में अवैध निर्माण की सूची मांगी थी।
  • असम सरकार ने 2022 और 2026 में भेजे गए रिमाइंडर्स के बावजूद कोई जानकारी साझा नहीं की है।
  • पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित चौधरी द्वारा दायर आरटीआई (RTI) से इस प्रशासनिक विफलता का खुलासा हुआ है।

असम सरकार काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व के नौ पशु गलियारों (एनिमल कॉरिडोर्स) और इसके डिफॉल्ट इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) के 10 किलोमीटर के दायरे में चल रही निर्माण गतिविधियों पर पूरी तरह मौन साधे हुए है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के मार्च 2022 के नोटिस का राज्य सरकार ने अब तक कोई ठोस जवाब नहीं दिया है, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अप्रैल 2019 में, देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक आदेश पारित किया था। इस आदेश के तहत, एक सींग वाले गैंडे के इस प्रसिद्ध आवास के दक्षिणी छोर पर वन्यजीवों और कार्बी आंगलोंग जिले के संवेदनशील पहाड़ी जल क्षेत्रों के संरक्षण के लिए सभी प्रकार के खनन, पत्थर उत्खनन और संबंधित गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके साथ ही, कोर्ट ने इन नौ चिन्हित गलियारों के भीतर निजी भूमि पर किसी भी नए निर्माण कार्य को भी वर्जित कर दिया था।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब गोलाघाट जिले के पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित चौधरी ने सूचना का अधिकार (RTI) कानून का उपयोग करते हुए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति से संपर्क किया। उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि मार्च 2022 की बैठक के बाद असम सरकार ने क्या कार्रवाई की है। आरटीआई के जवाब में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं।

सीईसी के विशेष कर्तव्य अधिकारी वी.के. पंथारी ने 17 जुलाई को दिए गए अपने जवाब में स्पष्ट किया कि असम सरकार से मांगी गई जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि समिति द्वारा 4 अप्रैल 2022 और फिर 5 मार्च 2026 को दो बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद असम प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पर्यावरण संरक्षण के संवेदनशील मुद्दों पर प्रशासनिक चुप्पी न केवल न्यायिक आदेशों की अवहेलना है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि स्थानीय वाणिज्यिक हितों को पारिस्थितिक संतुलन पर प्राथमिकता दी जा रही है। काजीरंगा जैसे वैश्विक धरोहर स्थल के गलियारों में हो रहे अवैध निर्माण को अनदेखा करना वन्यजीवों के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ है।

"काजीरंगा के वन्यजीवों, विशेष रूप से एक सींग वाले गैंडों के अस्तित्व के लिए इन गलियारों का सुरक्षित रहना अनिवार्य है। कंक्रीट के अवैध निर्माण उनके प्राकृतिक मार्ग को अवरुद्ध कर रहे हैं।"

Historical Background

काजीरंगा का इतिहास और इसका भौगोलिक महत्व अद्वितीय है। हर साल मानसून के दौरान जब ब्रह्मपुत्र नदी का पानी राष्ट्रीय उद्यान को जलमग्न कर देता है, तब वन्यजीव सुरक्षित स्थानों की तलाश में कार्बी आंगलोंग की पहाड़ियों की ओर पलायन करते हैं। ये नौ गलियारे उनके जीवन की रक्षा के लिए एकमात्र मार्ग हैं। अगर इन मार्गों पर कंक्रीट के निर्माण खड़े हो जाएंगे, तो जानवरों के पास डूबने या मानव बस्तियों में घुसने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

विशेषता (Feature)डिफॉल्ट नियम (Default Rule)असम सरकार का प्रस्ताव (Assam Govt Proposal)
इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) सीमा10 किलोमीटर (10 km)1 से 3 किलोमीटर (1 to 3 km)
गतिविधियों पर प्रतिबंधपूर्ण खनन और निर्माण प्रतिबंधसीमित और विनियमित गतिविधियां
क्या आप जानते हैं?: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान दुनिया के दो-तिहाई महान एक सींग वाले गैंडों का घर है, और यह यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर स्थल भी है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: काजीरंगा के एनिमल कॉरिडोर्स क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर: ये गलियारे बाढ़ के दौरान जानवरों को कार्बी आंगलोंग की पहाड़ियों पर सुरक्षित पलायन करने में मदद करते हैं।

प्रश्न 2: सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में क्या आदेश दिया था?
उत्तर: कोर्ट ने इन गलियारों में सभी प्रकार के खनन, पत्थर उत्खनन और नए निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।