बेंगलुरु में व्हाइट-टॉपिंग परियोजनाओं की स्थिति चिंताजनक है, जहां लगभग 70% प्रोजेक्ट्स अपनी समय सीमा चूक चुके हैं, जिससे शहर के ट्रैफिक में भारी जाम लग रहा है।
- बेंगलुरु की 78 में से 54 व्हाइट-टॉपिंग परियोजनाएं वर्तमान में देरी का सामना कर रही हैं।
- एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और ट्रैफिक पुलिस की अनुमति न मिलने को मुख्य कारण बताया गया है।
- परियोजनाओं में देरी के कारण मारथाहल्ली और लोअर अगराम जैसे प्रमुख क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम की स्थिति गंभीर हो गई है।
बेंगलुरु की सड़कों को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई व्हाइट-टॉपिंग परियोजनाएं शहर के लिए बड़ी मुसीबत बन गई हैं। ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के हालिया आंकड़ों से पता चला है कि शहर में चल रही लगभग 70% परियोजनाएं अपनी निर्धारित समय सीमा को पूरा करने में विफल रही हैं। इसका सीधा असर शहर के दैनिक यात्रियों पर पड़ रहा है, जो हर दिन घंटों ट्रैफिक जाम में फंसने को मजबूर हैं।
परियोजनाओं में देरी के मुख्य कारण
बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने विधानसभा में जानकारी दी कि शहर में कुल 78 व्हाइट-टॉपिंग कार्य चल रहे हैं, जिनमें से 54 काम अपनी डेडलाइन से पीछे हैं। प्रमुख रूप से हेन्नूर 80 फीट रोड, मस्जिद रोड, संजयनगर मेन रोड और होसाकेरहल्ली मेन रोड जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम रुका हुआ है।
B-SMILE अधिकारियों के अनुसार, इस देरी का सबसे बड़ा कारण विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी है। उदाहरण के तौर पर, केंगल हनुमानथैया (K.H.) रोड पर काम करने के लिए बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस (BTP) से अनुमति मिलने में काफी समय लगा, क्योंकि पुलिस का मानना था कि इस मुख्य मार्ग को बंद करने से शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
विभिन्न विभागों के बीच तालमेल का अभाव और अनुमति प्रक्रिया में देरी बेंगलुरु के बुनियादी ढांचे के विकास में सबसे बड़ी बाधा है।
बोजोकमीडिया विश्लेषण (BozokMedia analysis shows...)
बोजोकमीडिया विश्लेषण दर्शाता है कि बेंगलुरु का ट्रैफिक संकट केवल सड़कों की खराब स्थिति नहीं, बल्कि खराब प्रशासनिक नियोजन का परिणाम है। TomTom Traffic Index के अनुसार, बेंगलुरु दुनिया के सबसे भीड़भाड़ वाले शहरों में दूसरे स्थान पर है। जब व्हाइट-टॉपिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य अधूरे छोड़े जाते हैं, तो यह न केवल यात्रा के समय को बढ़ाता है, बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
व्हाइट-टॉपिंग का उद्देश्य सड़कों के किनारे कंक्रीट की परत बिछाना है ताकि फुटपाथ मजबूत हों और जल निकासी की व्यवस्था बेहतर हो सके। सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया के दौरान पानी और सीवर लाइनों को भी ठीक किया जाता है ताकि अगले 20 वर्षों तक सड़क को दोबारा न खोदना पड़े। हालांकि, नियोजन की कमी के कारण यह 'समाधान' वर्तमान में 'समस्या' बन गया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: व्हाइट-टॉपिंग परियोजना में देरी का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: मुख्य कारण विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी और ट्रैफिक पुलिस से आवश्यक अनुमति मिलने में होने वाली देरी है।
प्रश्न 2: किन क्षेत्रों में सबसे अधिक ट्रैफिक प्रभावित हो रहा है?
उत्तर: मारथाहल्ली जंक्शन, लोअर अगराम रोड और हेन्नूर जैसे क्षेत्रों में इन परियोजनाओं के कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित है।