मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में एक मशीन में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। इस दुखद घटना में एक नवजात की मौत हो गई है, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।

  • छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के NICU में रेडियंट वार्मर मशीन में शॉर्ट सर्किट से लगी आग।
  • एक नवजात की मृत्यु, दो अन्य बच्चे जबलपुर में उपचाराधीन।
  • अस्पताल में पर्याप्त वार्मर मशीनों की कमी और अत्यधिक भीड़ एक बड़ा मुद्दा।
  • प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ सरकारी जिला अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में शनिवार तड़के आग लगने से एक मासूम की जान चली गई। अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा रात लगभग 1:50 बजे हुआ, जब आउटबोर्न यूनिट में रखी एक रेडियंट वार्मर मशीन के फिलामेंट कॉइल में शॉर्ट सर्किट के कारण चिंगारी निकली और आग लग गई।

इस अग्निकांड में तीन नवजात बच्चे बुरी तरह झुलस गए। तत्काल सहायता के लिए उन्हें जबलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में रेफर किया गया, जहाँ डॉक्टरों ने एक बच्चे को बचाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन दुर्भाग्यवश उसकी मृत्यु हो गई। अन्य दो बच्चे फिलहाल स्थिर बताए जा रहे हैं। अस्पताल के प्रभारी और सिविल सर्जन कंचन दुबे ने इसे एक दुर्घटना करार देते हुए कहा कि नर्सों और अन्य स्टाफ ने तत्परता दिखाते हुए अन्य 30 बच्चों को सुरक्षित बचा लिया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना केवल एक तकनीकी खराबी नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में मौजूद गंभीर खामियों को भी उजागर करती है। NICU जैसी संवेदनशील इकाइयों में उपकरणों का रखरखाव और सुरक्षा मानक जीवन-मरण का प्रश्न बन जाते हैं।

स्थानीय बाल रोग विशेषज्ञ अंशुल लांबा ने बताया कि आग का मुख्य कारण कॉइल में शॉर्ट सर्किट था, जिससे निकली चिंगारियां पास में मौजूद ऑक्सीजन ट्यूबिंग पर गिरीं, जिससे आग तेजी से फैल गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल में विशेषज्ञ पीडियाट्रिक सर्जन की कमी के कारण बच्चों को जबलपुर भेजना पड़ा।

चिकित्सा उपकरणों का नियमित ऑडिट और आपातकालीन प्रोटोकॉल की कमी अक्सर ऐसी दुखद घटनाओं का कारण बनती है।

छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेन्द्र नारायण मिश्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि मशीन का 10 अगस्त को वार्षिक रखरखाव (Annual Maintenance) किया गया था, लेकिन अब भोपाल स्थित रखरखाव एजेंसी के इंजीनियरों द्वारा इसकी गहन जांच की जाएगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह पहली बार नहीं है जब NICU में ऐसी त्रासदी हुई है। नवंबर 2024 में, उत्तर प्रदेश के झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज अस्पताल के NICU में भीषण आग लगने से कम से कम 17 नवजात शिशुओं की मृत्यु हो गई थी। यह घटना सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षा मानकों की निरंतर विफलता को दर्शाती है।

क्या आप जानते हैं?: NICU में 'रेडियंट वार्मर' का उपयोग उन नवजात शिशुओं के शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए किया जाता है जो खुद से गर्मी नियंत्रित नहीं कर सकते।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: आग लगने का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: प्राथमिक जांच के अनुसार, रेडियंट वार्मर मशीन के फिलामेंट कॉइल में शॉर्ट सर्किट होने से चिंगारी निकली, जो ऑक्सीजन ट्यूबिंग के संपर्क में आने से आग में बदल गई।

प्रश्न 2: क्या अस्पताल में संसाधनों की कमी थी?
उत्तर: हाँ, कलेक्टर के अनुसार अस्पताल में 63 बच्चे थे लेकिन केवल 27 वार्मर मशीनें उपलब्ध थीं, जिसके कारण एक ही पालने में दो-तीन बच्चों को रखना पड़ रहा था।

विवरणवर्तमान स्थिति (छिंदवाड़ा)आवश्यकता
उपलब्ध वार्मर27 मशीनेंप्रत्येक बच्चे के लिए अलग
कुल नवजात संख्या63सुरक्षित प्रबंधन हेतु पर्याप्त क्षमता
विशेषज्ञ उपलब्धतापीडियाट्रिक सर्जन नहींतत्काल विशेषज्ञ सेवा