भारतीय रेलवे ने यात्रियों को सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए स्टेशनों पर पानी के टैंकों और फिल्टरों की सफाई के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है। यह कदम हाल ही में CAG रिपोर्ट में पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने के बाद उठाया गया है।

  • स्टेशनों पर पानी के टैंकों, फिल्टरों और वाटर कूलरों की गहन सफाई और मरम्मत की जाएगी।
  • पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए रासायनिक और बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षण किए जाएंगे।
  • CAG की रिपोर्ट में पानी में ई-कोलाई (E. coli) पाए जाने के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।

भारतीय रेलवे ने यात्रियों की स्वच्छता और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए देश भर के रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक व्यापक 'विशेष स्वच्छता अभियान' शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्टेशनों पर उपलब्ध पेयजल प्रणालियों, टैंकों और फिल्टरों का रखरखाव करना और यह सुनिश्चित करना है कि यात्रियों को मिलने वाला पानी पूरी तरह से सुरक्षित हो।

इस अभियान के तहत, सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिया गया है कि वे पानी के स्रोतों, ट्रीटमेंट प्लांट, भूमिगत और ओवरहेड टैंकों, पीवीसी टैंकों, वॉटर बूथों और नल बिंदुओं सहित संपूर्ण बुनियादी ढांचे का व्यापक निरीक्षण करें। सफाई प्रक्रिया में टैंकों को खाली करना, कीचड़ निकालना, रगड़कर साफ करना और कीटाणुशोधन (disinfection) शामिल है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम यात्री सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल ही में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट ने रेलवे स्टेशनों पर पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे, जिससे यात्रियों के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा मंडरा रहा था।

पानी की गुणवत्ता में सुधार केवल बुनियादी ढांचे का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह लाखों यात्रियों के विश्वास और स्वास्थ्य से जुड़ा एक अनिवार्य सुरक्षा मानक है।

विशेष रूप से, रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिया है कि टैंकों के ढक्कनों और वेंटों की जांच की जाए ताकि पक्षियों, जानवरों और काई (algae) से होने वाले संदूषण को रोका जा सके। क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों और फिल्टरों को तुरंत बदला जाएगा, और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पीने योग्य पानी और गैर-पीने योग्य पानी की लाइनों के बीच कोई क्रॉस-कनेक्शन न हो।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और CAG की चेतावनी

यह अभियान तब शुरू किया गया है जब CAG ने अपनी हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी थी कि 49 में से 8 रेलवे स्टेशनों (जिनमें मुंबई, केरल, तमिलनाडु और झारखंड के स्टेशन शामिल हैं) से लिए गए पानी के नमूनों में ई-कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया पाया गया। रिपोर्ट में कहा गया था कि पानी की नियमित जांच और क्लोरीन के स्तर की निगरानी में भारी कमी देखी गई है।

विशेषतापुराना मानकनया सुधारात्मक अभियान
निरीक्षण आवृत्तिअनियमितनियमित और निर्धारित अंतराल पर
बैक्टीरिया परीक्षणअपर्याप्तभौतिक, रासायनिक और बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षण
क्लोरीन निगरानीकम/उच्च स्तर की समस्यादैनिक अवशिष्ट-क्लोरीन निगरानी

इसके अलावा, रेलवे अब वाटर वेंडिंग मशीनों (WVM) की भी कड़ी निगरानी करेगा। जोनल रेलवे को स्टेशन-वार कमियों की रिपोर्ट देनी होगी ताकि रेलवे बोर्ड समयबद्ध तरीके से सुधार सुनिश्चित कर सके। यह अभियान केवल स्टेशनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे कॉलोनियों और कार्यस्थलों में भी लागू किया जाएगा।

Did You Know?: क्या आप जानते हैं कि रेलवे स्टेशनों पर पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए अब 'यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वाटर क्वालिटी प्रोटोकॉल' का सख्ती से पालन किया जा रहा है?

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: रेलवे इस अभियान में किन चीजों की सफाई कर रहा है?
उत्तर: रेलवे पानी के टैंकों, फिल्टरों, वाटर कूलरों, पाइपलाइनों और वाटर वेंडिंग मशीनों की सफाई कर रहा है।

प्रश्न 2: यह अभियान क्यों शुरू किया गया है?
उत्तर: CAG की रिपोर्ट में पानी में हानिकारक बैक्टीरिया (E. coli) पाए जाने के बाद यात्रियों को सुरक्षित पानी देने के लिए यह कदम उठाया गया है।