कर्नाटक वन विभाग ने नेलजी और पेरूर क्षेत्रों में अनधिकृत ट्रेकिंग और ड्रोन के उपयोग पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय वन्यजीवों की सुरक्षा और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए लिया गया है।

  • नेलजी और पेरूर क्षेत्रों में अनधिकृत व्यावसायिक ट्रेकिंग और पर्यटन गतिविधियों पर रोक।
  • वन क्षेत्र में ड्रोन उड़ाना और वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाना अब दंडनीय अपराध है।
  • हाथियों के क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटन से मानव जीवन को खतरा हो सकता है।

कोडगु, कर्नाटक: कर्नाटक वन विभाग ने नेलजी, पेरूर और आसपास के क्षेत्रों में अनधिकृत व्यावसायिक ट्रेकिंग और पर्यटन गतिविधियों को आयोजित करने के विरुद्ध सख्त चेतावनी जारी की है। विभाग ने यह कदम तब उठाया है जब सोशल मीडिया के माध्यम से इन क्षेत्रों में अनियंत्रित भीड़ जुटाने और पर्यटन को बढ़ावा देने की गतिविधियां देखी गई हैं।

यह क्षेत्र अपनी समृद्ध वनस्पति, विशेष रूप से स्ट्रोबिलैंथस (Strobilanthes) प्रजाति और प्राकृतिक जल स्रोतों के लिए जाना जाता है। वन विभाग के अनुसार, ये क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील 'शोला-घास के मैदान' (shola-grassland) पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं। इन क्षेत्रों में वनस्पतियों को तोड़ना, कुचलना या नष्ट करना अब कानूनन अपराध माना जाएगा।

वन्यजीवों और सुरक्षा का संकट

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये क्षेत्र जंगली हाथियों के आवागमन के मुख्य मार्ग हैं। अनियंत्रित पर्यटन गतिविधियों के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है, जिससे मानव जीवन को गंभीर खतरा हो सकता है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी पर्यटन गतिविधि के दौरान वन्यजीवों के कारण कोई दुर्घटना, चोट या मृत्यु होती है, तो इसके लिए आयोजक और संबंधित एजेंसियां सीधे तौर पर नागरिक और आपराधिक कानूनों के तहत जिम्मेदार होंगी।

वन विभाग के अनुसार, निजी भूमि की सीमाओं से परे वन क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश कर्नाटक वन अधिनियम, 1963 के तहत एक दंडनीय अपराध है।

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि सोशल मीडिया पर 'छिपे हुए खजानों' (hidden gems) के रूप में इन स्थानों का प्रचार अक्सर स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी साबित होता है। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना भी वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत प्रतिबंधित है, क्योंकि यह जानवरों के व्यवहार में व्यवधान डाल सकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कर्नाटक का कोडगु क्षेत्र अपनी जैव विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ के 'शोला' वन प्राचीन काल से ही अद्वितीय पारिस्थितिक संतुलन बनाए हुए हैं। हाल के वर्षों में, बढ़ते सोशल मीडिया प्रभाव के कारण, इन संवेदनशील क्षेत्रों में अनियोजित पर्यटन ने वन्यजीवों के आवास और स्थानीय वनस्पतियों के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर दी हैं।

Frequently Asked Questions

1. क्या नेलजी-पेरूर में ड्रोन उड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित है?
हाँ, वन और वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत वन क्षेत्रों के ऊपर अनधिकृत ड्रोन उड़ानें प्रतिबंधित हैं।

2. यदि कोई ट्रेकिंग आयोजित करता है और दुर्घटना होती है, तो क्या होगा?
आयोजकों को नागरिक और आपराधिक दोनों तरह की कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

Did You Know?: कोडगु के शोला वन दुनिया के सबसे अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक हैं, जो केवल उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।