दक्षिण अफ्रीका में सोशल मीडिया पर बढ़ता मुस्लिम विरोधी विमर्श और ग्रामीण इलाकों में रहने वाली शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की हकीकत के बीच एक गहरा अंतर दिखाई दे रहा है।
- सोशल मीडिया पर इस्लाम के खिलाफ दुष्प्रचार बढ़ रहा है, लेकिन ग्रामीण दक्षिण अफ्रीका में सांप्रदायिक सद्भाव बना हुआ है।
- दक्षिण अफ्रीका की आबादी का केवल 1.6% हिस्सा मुस्लिम है, लेकिन उनकी ऐतिहासिक जड़ें सदियों पुरानी हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यह नफरत जमीनी स्तर के बजाय शहरी और डिजिटल क्षेत्रों में अधिक केंद्रित है।
दक्षिण अफ्रीका के ग्रामीण इलाकों, विशेष रूप से क्वाज़ुलु-नताल के nquthu क्षेत्र में, जीवन की गति सोशल मीडिया पर चल रहे शोर से बिल्कुल अलग है। 105 वर्षीय Zwelibi Jack Ngubane की मृत्यु के बाद, उनके परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें मुस्लिम रीति-रिवाजों से दफनाया। हालांकि यह समुदाय मुख्य रूप से ईसाई और पारंपरिक अफ्रीकी मान्यताओं का पालन करता है, लेकिन इस अंतिम संस्कार ने किसी विवाद को जन्म नहीं दिया, बल्कि यह सहिष्णुता का एक उदाहरण बना।
इसके विपरीत, डिजिटल दुनिया में परिदृश्य काफी भयावह है। पिछले कुछ महीनों में, दक्षिण अफ्रीका में प्रवासन (migration) के खिलाफ बढ़ते आक्रोश ने अनजाने में मुस्लिम समुदायों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ऑनलाइन पोस्ट्स में आरोप लगाया जा रहा है कि मुस्लिम संगठन धर्म परिवर्तन के लिए दान का उपयोग कर रहे हैं, जो कि जमीनी सच्चाई से कोसों दूर है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि डिजिटल दुष्प्रचार का उद्देश्य अक्सर सामाजिक दरारें पैदा करना होता है। जब ऑनलाइन नफरत को वास्तविक दुनिया के संघर्षों के रूप में पेश किया जाता है, तो यह उन समुदायों के बीच अविश्वास पैदा कर सकता है जो सदियों से साथ रह रहे हैं।
'ऑनलाइन नफरत को सीधे तौर पर समाज के व्यापक इस्लामफोबिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए; यह एक वैश्विक डिजिटल प्रवृत्ति का हिस्सा है।'
दक्षिण अफ्रीका में इस्लाम का इतिहास काफी पुराना है। 17वीं शताब्दी से ही, दासता और राजनीतिक निर्वासन के माध्यम से मुस्लिम समुदाय इस देश का हिस्सा बने। आज, इस समुदाय में भारतीय मूल के लोग, अश्वेत अफ्रीकी मुस्लिम और हाल के प्रवासी शामिल हैं। Thembisa Fakude जैसे राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह नफरत संगठित नहीं है, बल्कि कुछ उग्र राष्ट्रवादियों द्वारा भड़काई जा रही है।
एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि यह तनाव गांवों में नहीं, बल्कि शहरों और छात्रावासों (hostels) में अधिक देखा जा रहा है। जहाँ ग्रामीण इलाकों में लोग एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करते हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में आर्थिक असुरक्षा और प्रवासन के मुद्दों को धार्मिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या दक्षिण अफ्रीका में इस्लामफोबिया बढ़ रहा है?
उत्तर: ऑनलाइन स्तर पर नफरत बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण समुदायों में सामाजिक सद्भाव अभी भी कायम है।
प्रश्न 2: दक्षिण अफ्रीका में मुस्लिम समुदाय कब से है?
उत्तर: मुस्लिम समुदाय 17वीं शताब्दी से दक्षिण अफ्रीका में मौजूद है, जो विभिन्न ऐतिहासिक मार्गों से यहाँ आए थे।