नागापट्टिनम के जिला कलेक्टर और निगरानी अधिकारी ने जिले में चल रहे जल संसाधन और गाद निकालने (desilting) कार्यों का निरीक्षण किया। सिंचाई और जल निकासी के लिए बड़े पैमाने पर नहरों और तालाबों का कायाकल्प किया जा रहा है।
- विशेष गाद निकालने योजना के तहत 57 कार्य पूरे कर लिए गए हैं।
- कुल 399.40 किमी लंबी नहरों का गाद निकाला गया।
- ग्रामीण विकास विभाग ₹4.61 करोड़ की लागत से 170 चैनलों का काम कर रहा है।
- जिले में सिंचाई के लिए 15 नदियाँ और सैकड़ों चैनल मौजूद हैं।
नागापट्टिनम में जल प्रबंधन और कृषि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक व्यापक समीक्षा बैठक की है। जिला निगरानी अधिकारी एस. सुरेश कुमार और जिला कलेक्टर के. जे. प्रवीण कुमार ने रविवार को जिले के विभिन्न जल स्रोतों का दौरा किया और चल रहे गाद निकालने (desilting) कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति का जायजा लिया।
जल संसाधन विभाग की विशेष गाद निकालने योजना के तहत, जिले में ₹6.07 करोड़ की लागत से 57 कार्यों को मंजूरी दी गई थी, जो कुल 399.40 किमी क्षेत्र में फैले हुए हैं। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस योजना के अंतर्गत सभी निर्धारित कार्य सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं। यह कदम आगामी मानसून और कृषि सिंचाई आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
क्षेत्रीय जल नेटवर्क का महत्व
नागापट्टिनम जिले की भौगोलिक संरचना काफी जटिल है, जहाँ कुल 15 नदियाँ बहती हैं। इनमें से छह नदियाँ कावेरी नदी बेसिन डिवीजन (तंजावुर) के अंतर्गत आती हैं, जबकि शेष नौ नदियाँ वेन्नारु नदी बेसिन डिवीजन (तिरुवारुर) के नियंत्रण में हैं। ये नदियाँ 232 'बी-डिवीजन' चैनलों (850.61 किमी) और 1,115 'ए-डिवीजन' चैनलों (1,243.90 किमी) को पोषित करती हैं, जो जिले के कृषि क्षेत्रों के लिए जीवन रेखा के समान हैं।
नहरों की समय पर सफाई न केवल बाढ़ के खतरे को कम करती है, बल्कि कृषि उत्पादकता को भी सीधे तौर पर बढ़ावा देती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कृषि प्रधान क्षेत्रों में जल संचयन और नहरों का रखरखाव सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। यदि गाद निकालने का काम समय पर नहीं होता है, तो मानसून के दौरान जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।
इसके अतिरिक्त, ग्रामीण विकास विभाग भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। विभाग द्वारा लगभग ₹4.61 करोड़ की लागत से 170 चैनलों का गाद निकाला जा रहा है, जिसमें 2.70 लाख मानव-दिवस (persondays) का श्रम शामिल है। साथ ही, 46 तालाबों के पुनरुद्धार पर ₹1.43 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं और 23 नए तालाबों की खुदाई की जा रही है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: गाद निकालने (Desilting) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य नहरों और तालाबों की भंडारण क्षमता को बढ़ाना और पानी के प्रवाह को सुचारू बनाना है ताकि बाढ़ और सूखे दोनों से बचा जा सके।
प्रश्न 2: क्या किसानों की मांग पर भी काम किया जा रहा है?
उत्तर: हाँ, विशेष योजना के बाहर के चैनलों में भी मशीनों के माध्यम से किसानों के अनुरोध और प्राथमिकता के आधार पर गाद निकालने का कार्य किया जा रहा है।