साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए गरियाबंद पुलिस वरिष्ठ नागरिकों को 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे आधुनिक फ्रॉड से बचाने के लिए घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चला रही है।

  • 30 अगस्त से 5 सितंबर तक पुलिस द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान।
  • सीबीआई, ईडी और आरबीआई अधिकारियों के नाम पर फर्जी कॉल के जरिए ठगी का प्रयास।
  • स्पष्ट चेतावनी: कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती।

साइबर अपराधों के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए गरियाबंद पुलिस ने एक सराहनीय पहल की है। 'साइबर जागृति अभियान' के तीसरे सप्ताह के तहत, पुलिस बल गांव-गांव पहुंचकर विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों से संवाद कर रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को उन डिजिटल जालसाजों से बचाना है जो तकनीक का सहारा लेकर लोगों की जीवन भर की कमाई लूट रहे हैं।

पुलिस ने विशेष रूप से 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर होने वाली ठगी के प्रति लोगों को सचेत किया है। वर्तमान में साइबर ठग केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या अन्य सरकारी संस्थाओं के अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध पार्सल या किसी फर्जी केस में फंसाने का डर दिखाकर भारी रकम की मांग करते हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, ग्रामीण भारत में स्मार्टफोन की पहुंच तो बढ़ी है, लेकिन डिजिटल साक्षरता की कमी है। अपराधी इसी अंतर का फायदा उठाते हैं। जब पुलिस स्वयं गांव-गांव जाकर संवाद करती है, तो लोगों का डर कम होता है और वे ठगों के मनोवैज्ञानिक दबाव में आने के बजाय सतर्क रहते हैं।

"डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि एक मनोवैज्ञानिक हमला है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति को डराकर उसे सोचने-समझने की शक्ति से वंचित करना है।"

जागरूकता अभियान के दौरान पुलिस ने नागरिकों को सख्त हिदायत दी है कि वे अनजान व्यक्तियों के साथ अपना ओटीपी (OTP), एटीएम पिन, सीवीवी (CVV), बैंक खाता विवरण या यूपीआई पिन साझा न करें। साथ ही, किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई भी मोबाइल ऐप डाउनलोड करने से बचने की सलाह दी गई है।

पुलिस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानूनन कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से किसी को गिरफ्तार नहीं करती है। यदि ऐसा कोई कॉल आता है, तो घबराने के बजाय तुरंत कॉल काट देना चाहिए और इसकी सूचना नजदीकी पुलिस स्टेशन को देनी चाहिए।

ऐतिहासिक रूप से, ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर ठगी केवल लॉटरी या साधारण फिशिंग तक सीमित थी, लेकिन अब 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे जटिल तरीकों का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि अपराधी अब अधिक संगठित और खतरनाक हो गए हैं।

क्या आप जानते हैं?: अधिकांश 'डिजिटल अरेस्ट' कॉल की शुरुआत एक फर्जी कूरियर कंपनी के मैसेज से होती है, जिसमें दावा किया जाता है कि आपके नाम का पार्सल पकड़ा गया है जिसमें प्रतिबंधित सामग्री है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या पुलिस या सीबीआई वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी कर सकती है?
बिल्कुल नहीं। भारत में किसी भी एजेंसी द्वारा वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी या पूछताछ की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है।

प्रश्न 2: यदि मुझे ऐसा कोई संदिग्ध कॉल आए तो मुझे क्या करना चाहिए?
तुरंत कॉल काटें, घबराएं नहीं और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर इसकी रिपोर्ट करें।