पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा उनके संस्मरण को रोकने से लेकर 'द रेड साड़ी' पर कानूनी लड़ाई तक, सोनिया गांधी का किताबों के साथ रिश्ता हमेशा विवादों में रहा है।

  • पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने संपादकीय बदलावों पर असहमति के कारण सोनिया गांधी की किताब 'Belonging' को रद्द कर दिया।
  • कांग्रेस पार्टी ने जेवियर मोरो की किताब 'द रेड साड़ी' के प्रकाशन को रोकने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी थी।
  • इन्दिरा गांधी की जीवनी को लेकर मेनका गांधी और सोनिया गांधी के बीच राजनीतिक विवाद हुआ था।

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के बहुप्रतीक्षित संस्मरण 'Belonging: A Journey of Love' के प्रकाशन को पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) द्वारा रद्द करने का निर्णय केवल एक व्यावसायिक फैसला नहीं है, बल्कि यह उन विवादों की कड़ी है जो लंबे समय से उनके जीवन और उनकी पहचान से जुड़े रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यह विवाद पांडुलिपि में कुछ "संपादकीय बदलावों और विलोपनों" की मांग को लेकर शुरू हुआ, जिसे लेखिका ने खारिज कर दिया था।

यह पहली बार नहीं है जब सोनिया गांधी का नाम किसी किताब के विवाद से जुड़ा हो। सालों पहले, जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब पार्टी ने जेवियर मोरो की किताब 'द रेड साड़ी' के लेखक और प्रकाशक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। यह किताब सोनिया गांधी के इटली में बिताए बचपन का एक नाटकीय विवरण थी, जिसे मूल रूप से 2008 में स्पेनिश भाषा में प्रकाशित किया गया था।

कांग्रेस पार्टी और उनके कानूनी सलाहकार अभिषेक मनु सिंघवी ने इस किताब को "अनधिकृत, मानहानिकारक और अश्लील" करार दिया था। विवाद का मुख्य बिंदु यह था कि किताब में सोनिया गांधी के इटली के जीवन और राजीव गांधी की हत्या के बाद उनके मानसिक द्वंद्व को जिस तरह पेश किया गया था, वह पार्टी की छवि के अनुकूल नहीं था। लेखक मोरो का दावा था कि कांग्रेस चाहती थी कि सोनिया गांधी को पूरी तरह से 'भारतीय' के रूप में पेश किया जाए।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, ये साहित्यिक विवाद वास्तव में 'नैरेटिव कंट्रोल' (कथा नियंत्रण) की लड़ाई हैं। भारतीय राजनीति में 'पहचान' और 'मूल' एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। अपनी शीर्ष नेतृत्व की जीवनी पर नियंत्रण रखकर, कांग्रेस पार्टी ऐतिहासिक रूप से सोनिया गांधी को उनके विदेशी मूल से जुड़े हमलों से बचाने की कोशिश करती रही है।

राजनीतिक हस्तियों की गोपनीयता और पत्रकारिता की स्वतंत्रता के बीच का संघर्ष तब चरम पर होता है जब कोई कहानी उनके द्वारा गढ़े गए सार्वजनिक व्यक्तित्व को चुनौती देती है।

किताबों का यह विवाद केवल सोनिया गांधी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवार के भीतर भी फैला। 2001 में, कैथरीन फ्रैंक की किताब 'Indira: The Life of Indira Gandhi' को लेकर मेनका गांधी ने मानहानि का मुकदमा जीता था। हालांकि, इस कानूनी जीत के बाद राजनीतिक युद्ध छिड़ गया जब मेनका गांधी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने ही लेखिका को इनपुट दिए थे ताकि परिवार के अन्य सदस्यों, विशेषकर संजय गांधी की छवि खराब की जा सके।

उस समय विपक्ष में रही कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मेनका गांधी को सत्ता का लोभी बताया। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि नेहरू-गांधी परिवार के भीतर किताबें केवल जानकारी का स्रोत नहीं, बल्कि आपसी वैचारिक युद्ध का हथियार बन गई थीं।

क्या आप जानते हैं?: 'द रेड साड़ी' शीर्षक उस साड़ी से प्रेरित है जिसे जवाहरलाल नेहरू ने इंदिरा गांधी के लिए बुना था और जिसे सोनिया गांधी ने अपनी शादी में पहना था।
किताब का नाम मुख्य विवाद परिणाम
Belonging: A Journey of Love संपादकीय बदलावों पर विवाद प्रकाशन रद्द
The Red Sari मानहानि और अनधिकृत विवरण 2015 में भारत में प्रकाशित
Indira: The Life of Indira Gandhi मेनका गांधी द्वारा मानहानि मामला पाठ का आंशिक विलोपन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेंगुइन रैंडम हाउस ने सोनिया गांधी की किताब क्यों छोड़ी?
प्रकाशक ने पांडुलिपि में कुछ बदलावों की मांग की थी, जिसे सोनिया गांधी ने स्वीकार नहीं किया।

'द रेड साड़ी' पर मुख्य आपत्ति क्या थी?
कांग्रेस पार्टी का मानना था कि यह किताब तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है और उनकी निजी जिंदगी का अनधिकृत विवरण देती है।