मुंबई के नए मृणालताई गोरे फ्लाईओवर की अत्यधिक चिकनी सतह मोटरसवारों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। बारिश के दौरान यह सड़क 'स्लिपवे' बन गई है, जिससे लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं।

  • मृणालताई गोरे फ्लाईओवर की अत्यधिक चिकनी सतह के कारण बाइक सवार फिसल रहे हैं।
  • परियोजना की लागत 170.82 करोड़ से बढ़कर 247.97 करोड़ रुपये हो गई।
  • निर्माण में 8 साल का समय लगा, लेकिन गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मुंबई के मृणालताई गोरे फ्लाईओवर का हालिया उद्घाटन शहर के लिए राहत लाने के बजाय मुसीबत बन गया है। उद्घाटन के महज दो महीने बाद, इस पुल की 'सुपर स्मूथ' (अत्यधिक चिकनी) सतह विवादों के घेरे में है। स्थानीय निवासियों और मोटरसवारों का आरोप है कि सड़क पर इस्तेमाल किया गया 'मैस्टिक' (mastic) इतना चिकना है कि वाहन, विशेषकर दोपहिया वाहन, नियंत्रण खोकर फिसल रहे हैं।

लोकहंडवाला ओशिवारा सिटीजन एसोसिएशन (LOCA) के सह-संस्थापक धवल शाह ने बताया कि दुर्घटनाएं मुख्य रूप से फ्लाईओवर के ढलान वाले हिस्से पर हो रही हैं। उन्होंने कहा, "सड़क की सतह बहुत अधिक चिकनी है और बारिश के दौरान यह स्थिति और भी भयावह हो जाती है। यह पैच अब क्षेत्र में दुर्घटनाओं का केंद्र बन गया है।"

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे के प्रबंधन में गंभीर विफलता का संकेत है। जब एक सार्वजनिक परियोजना अपनी मूल लागत से 45% अधिक महंगी हो जाती है और फिर भी बुनियादी सुरक्षा मानकों (जैसे सड़क की घर्षण क्षमता) में विफल रहती है, तो यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार या घोर लापरवाही की ओर इशारा करता है।

LOCA के एक अन्य सह-संस्थापक करण जोतवानी ने सुझाव दिया है कि बीएमसी (BMC) को सड़क की ऊपरी परत पर 'रफ टार' (खुरदरा डामर) डालना चाहिए ताकि घर्षण बढ़े और फिसलने की घटनाएं कम हों। हालांकि, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने घटिया काम के आरोपों से इनकार किया है।

"सड़क की सतह का घर्षण गुणांक (Coefficient of Friction) सुरक्षा मानकों के अनुरूप होना चाहिए, विशेषकर ढलान वाले क्षेत्रों में, ताकि बारिश के दौरान जल-निकासी और ग्रिप बनी रहे।"

इस फ्लाईओवर का इतिहास भी विवादों से भरा रहा है। 750 मीटर लंबे इस पुल को बनाने में लगभग 8 साल लगे। लागत में भारी वृद्धि और निर्माण की धीमी गति ने पहले ही नागरिकों में नाराजगी पैदा कर दी थी। जून के महीने में सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए थे जिनमें सड़क की सतह पिघलती हुई और मोटरसाइकिल स्टैंड के वजन से सड़क का हिस्सा धंसता हुआ देखा गया था।

सोशल मीडिया पर लोग अब बीएमसी का मजाक उड़ा रहे हैं। एक यूजर ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि यह 'क्रांतिकारी स्मूथ राइड तकनीक' है जिससे माइलेज तो बढ़ता है, लेकिन चालक अभी इसे चलाने के लिए तैयार नहीं हैं, इसलिए वे गिर रहे हैं।

क्या आप जानते हैं?: सड़क निर्माण में 'मैस्टिक' एक विशेष प्रकार का बिटुमेन मिश्रण होता है जिसे स्थायित्व के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन यदि इसका अनुपात गलत हो, तो यह अत्यधिक चिकना हो सकता है।
विवरणमूल अनुमानअंतिम लागत/स्थिति
कुल लागत₹170.82 करोड़₹247.97 करोड़
निर्माण समयनिर्धारित समयलगभग 8 वर्ष
सड़क की स्थितिमानक घर्षणअत्यधिक चिकनी (Slippery)

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: मृणालताई गोरे फ्लाईओवर किन क्षेत्रों को जोड़ता है?
उत्तर: यह फ्लाईओवर राम मंदिर और गोरेगांव के बीच सीधा संपर्क प्रदान करता है, जिससे एसवी रोड और लिंक रोड का ट्रैफिक कम होता है।

प्रश्न 2: निवासियों ने समस्या के समाधान के लिए क्या सुझाव दिया है?
उत्तर: निवासियों ने बीएमसी से सड़क की ऊपरी परत पर खुरदरा डामर (rough tar) लगाने की मांग की है ताकि वाहनों की पकड़ बेहतर हो सके।