सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश द्वारा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाए जाने के बाद, जयपुर और जोधपुर के वकीलों ने उनके इस्तीफे और जांच की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है।

  • जयपुर और जोधपुर के वकील एक्टिंग CJ संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने CJI को पत्र लिखकर 'शक्तियों के दुरुपयोग' का आरोप लगाया।
  • जोधपुर के वकील संगठनों ने रविवार तक पूर्ण हड़ताल का ऐलान किया है।
  • मांग है कि समयबद्ध जांच हो और स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की जाए।

राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था इस समय एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है। जयपुर में वकीलों के एक बड़े समूह ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की अदालत के बाहर धरना प्रदर्शन किया। वहीं, जोधपुर में स्थिति और गंभीर हो गई है, जहां वकील संघों ने रविवार तक हड़ताल की घोषणा कर दी है। यह विरोध प्रदर्शन उस समय शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने न्यायिक गलियारों में हलचल मचा दी।

इस पूरे विवाद की जड़ सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को लिखे गए पत्र हैं। 2, 10 और 17 अगस्त को भेजे गए इन पत्रों में जस्टिस मेहता ने जस्टिस शर्मा पर "शक्तियों के दुरुपयोग" का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने उल्लेख किया कि उन्हें ऐसी कई शिकायतें मिली हैं जो एक्टिंग CJ की "सत्यनिष्ठा (Integrity)" पर संदेह पैदा करती हैं। इसी आधार पर उन्होंने जस्टिस शर्मा का तबादला किसी अन्य हाईकोर्ट में करने और नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग की है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं है, बल्कि उच्च न्यायपालिका के भीतर एक गहरा टकराव है। जब सुप्रीम कोर्ट का एक न्यायाधीश सार्वजनिक रूप से हाईकोर्ट के नेतृत्व की ईमानदारी पर सवाल उठाता है, तो इससे पूरी न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। बार एसोसिएशन द्वारा जांच के निष्कर्षों को सार्वजनिक करने की मांग यह दर्शाती है कि अब न्यायिक जवाबदेही में पारदर्शिता की मांग बढ़ रही है।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता उसके नेतृत्व की निष्पक्षता पर टिकी होती है; एक्टिंग CJ के आचरण पर कोई भी संदेह राज्य में न्याय की नींव को कमजोर करता है।

जयपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने बताया कि वे CJI को एक कड़ा प्रतिवेदन भेज रहे हैं। उनकी मांग है कि इस मामले की जांच एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरी की जाए और उसका परिणाम सार्वजनिक किया जाए, क्योंकि यह मामला अब पब्लिक डोमेन में आ चुका है। उनका तर्क है कि इस देरी से न तो अधिवक्ताओं का हित है और न ही न्यायपालिका का।

जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन और एडवोकेट्स एसोसिएशन ने सख्त रुख अपनाते हुए मांग की है कि एक्टिंग CJ को तत्काल उनके न्यायिक और प्रशासनिक कर्तव्यों से मुक्त किया जाए। 27 अगस्त को जयपुर और जोधपुर के तीनों प्रमुख वकील संगठनों की एक आपातकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक हुई, जिसमें इस घटनाक्रम पर "गंभीर चिंता" व्यक्त की गई।

वकीलों ने अपने साझा बयान में कहा कि न्यायपालिका केवल न्याय देने वाली संस्था नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के विश्वास का अंतिम केंद्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पद या संस्थागत व्यवस्था का दुरुपयोग अक्षम्य है और संस्थागत गरिमा को व्यक्तिगत पदों से ऊपर रखा जाना चाहिए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

राजस्थान हाईकोर्ट में प्रशासनिक अस्थिरता की खबरें पहले भी आती रही हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के हस्तक्षेप के बाद यह मामला गंभीर हो गया है। जोधपुर बार लंबे समय से एक स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग कर रहा है, क्योंकि 'कार्यवाहक' प्रमुख के लंबे कार्यकाल से प्रशासनिक निर्णय लेने में देरी और अनिश्चितता बनी रहती है।

क्या आप जानते हैं?: भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादले का अधिकार केवल 'सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम' के पास होता है, जिससे जस्टिस मेहता के पत्र इस मामले में सबसे शक्तिशाली कानूनी हथियार बन गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: जोधपुर के वकील हड़ताल पर क्यों हैं?
वे एक्टिंग CJ संजीव प्रकाश शर्मा पर लगे भ्रष्टाचार और शक्तियों के दुरुपयोग के आरोपों के कारण उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

प्रश्न 2: एक्टिंग CJ के खिलाफ शिकायत किसने की थी?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने CJI सूर्यकांत को पत्र लिखकर इन गंभीर आरोपों को उठाया था।