बेंगलुरु की एक विशेष एनआईए अदालत ने 'अल हिंद मॉड्यूल' के दूसरे आरोपी सैयद फसीउर रहमान को सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी ने आतंकवाद विरोधी कानून (UAPA) के तहत अपना दोष स्वीकार कर लिया है।
- सैयद फसीउर रहमान को एनआईए कोर्ट ने 7 साल की जेल की सजा सुनाई।
- आरोपी ने UAPA और आर्म्स एक्ट सहित कुल 9 आरोपों में अपना दोष स्वीकार किया।
- यह मामला 2019-20 के दौरान सक्रिय 'अल हिंद मॉड्यूल' से जुड़ा है।
बेंगलुरु की एक विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अदालत ने इस्लामिक स्टेट (IS) से जुड़े एक बड़े आतंकी साजिश के मामले में दूसरे आरोपी, 37 वर्षीय सैयद फसीउर रहमान को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 29 अगस्त को आया, जब रहमान ने अदालत के समक्ष अपना दोष स्वीकार कर लिया।
रहमान उन 20 लोगों में शामिल है जिन्हें 'अल हिंद मॉड्यूल' से संबंधित मामले में चार्जशीट किया गया था। यह मॉड्यूल कथित तौर पर विदेशी हैंडलरों और दक्षिण भारत के आतंकी संदिग्धों के इशारे पर नए सदस्यों की भर्ती करने और फंड जुटाने का काम कर रहा था। रहमान ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA), भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश और आर्म्स एक्ट के तहत आरोपों को स्वीकार किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और मॉड्यूल का जाल
इस आतंकी साजिश का खुलासा दिसंबर 2019 में हुआ था, जब तमिलनाडु पुलिस खाजा मोइदीन नामक एक कट्टरपंथी की तलाश कर रही थी। मोइदीन ने बेंगलुरु में 'अल हिंद ट्रस्ट' नामक एक संस्था बनाई थी, जिसका उपयोग सामाजिक सेवा के नाम पर युवाओं के कट्टरपंथीकरण और आईएसआईएस (ISIS) की विचारधारा फैलाने के लिए किया जा रहा था।
जांच में पाया गया कि इस मॉड्यूल के सदस्य कर्नाटक और तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में बैठकें करते थे, हथियार जुटाते थे और आतंकी गतिविधियों की योजना बनाते थे। इस मामले में एक और महत्वपूर्ण नाम अब्दुल मतीन तहा का है, जो बेंगलुरु के प्रसिद्ध 'रामेश्वरम कैफे' धमाके के आरोपी के रूप में भी जाना जाता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह मामला इस बात की पुष्टि करता है कि कैसे चैरिटी और सोशल सर्विस ट्रस्ट का मुखौटा पहनकर आतंकी संगठन युवाओं को निशाना बना रहे हैं। यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चेतावनी है कि कट्टरपंथीकरण अब केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर संस्थागत रूप ले रहा है।
आतंकवादी मॉड्यूल अब सामाजिक कार्यों की आड़ में अपनी जड़ें जमा रहे हैं, जिससे उनकी पहचान करना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
इस मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब यह पता चला कि इस समूह के दो सदस्यों ने जनवरी 2020 में केरल-तमिलनाडु सीमा पर एक पुलिसकर्मी, विल्सन की गोली मारकर हत्या कर दी थी। एनआईए ने बेंगलुरु पुलिस से इस मामले की जांच तब संभाली जब साजिश का दायरा अंतरराज्यीय पाया गया।
Frequently Asked Questions
1. अल हिंद मॉड्यूल क्या था?
यह एक आतंकी नेटवर्क था जिसने 2019-20 में दक्षिण भारत में आईएसआईएस के लिए भर्ती और फंड जुटाने का काम किया था।
2. आरोपी ने अपनी याचिका क्यों बदली?
सूत्रों के अनुसार, लगभग छह साल जेल में रहने और मुकदमे के शुरुआती चरण में होने के कारण रहमान ने अपना दोष स्वीकार कर लिया।