सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद गहरा गया है। अंतरराष्ट्रीय अदालत (ICJ) के फैसले को भारत ने खारिज कर दिया है, जिसके बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
- भारत ने सिंधु जल संधि पर हेग कोर्ट के हस्तक्षेप को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है।
- पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने भारत की कार्रवाई को 'मनमाना' करार दिया है।
- अंतरराष्ट्रीय अदालत ने संधि की शर्तों के पालन का निर्देश दिया था, जिसे भारत ने अमान्य माना है।
भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुरानी सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty - IWT) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। हाल ही में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत (ICJ) ने इस संधि को बहाल करने और इसके नियमों का पालन करने का निर्देश दिया था। हालांकि, भारत सरकार ने इस फैसले को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला अदालत के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) में नहीं आता है।
इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने भारत पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारत की 'मनमानी हरकतें' अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहीं नहीं टिकेंगी। खार का तर्क है कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी कर रहा है, जो क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this clash is not merely about water sharing but is a reflection of the deep-rooted geopolitical distrust between New Delhi and Islamabad. By rejecting the ICJ's intervention, India is signaling a shift toward a more assertive bilateral approach, refusing to let third-party mediators dictate terms on strategic resources.
"The rejection of the Hague court's decision marks a pivotal shift in India's diplomatic strategy regarding the Indus Waters Treaty."
ऐतिहासिक रूप से, 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित यह संधि दोनों देशों के बीच एकमात्र ऐसे समझौतों में से एक है जो युद्धों के बावजूद कायम रहा। लेकिन हाल के वर्षों में, भारत ने किशनगंगा और रतले जैसी पनबिजली परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान के विरोध के कारण संधि की समीक्षा करने के संकेत दिए हैं।
भारत का तर्क है कि पाकिस्तान द्वारा निरंतर अवरोध पैदा करने के कारण अब इस संधि में संशोधन की आवश्यकता है। वहीं, पाकिस्तान इसे अपनी जल सुरक्षा के लिए खतरा मानता है और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग करता रहा है।
Frequently Asked Questions
1. सिंधु जल संधि क्या है?
यह 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई एक संधि है जो सिंधु नदी प्रणाली के जल वितरण को नियंत्रित करती है।
2. भारत ने हेग कोर्ट के फैसले को क्यों खारिज किया?
भारत का मानना है कि यह मामला अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और संधि के विवाद समाधान तंत्र के तहत ही देखा जाना चाहिए।