कोच्चि के मुंडमवेली स्थित P&T अपार्टमेंट में भारी रिसाव के कारण लगभग 65 स्कूली बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही है। केरल राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने इस गंभीर स्थिति पर जांच के आदेश दिए हैं और GCDA से रिपोर्ट मांगी है।

  • मुंडमवेली के P&T अपार्टमेंट में बारिश और शौचालय के पानी का रिसाव एक गंभीर समस्या बन गया है।
  • लगभग 65 स्कूली छात्र रिसाव के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
  • केरल राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने ग्रेटर कोचीन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GCDA) से इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

केरल के कोच्चि स्थित मुंडमवेली में रहने वाले परिवारों के लिए बारिश का मौसम राहत के बजाय एक अभिशाप बन गया है। P&T अपार्टमेंट परिसर में हो रहे भीषण रिसाव ने न केवल घरों की स्थिति खराब कर दी है, बल्कि वहां रहने वाले लगभग 65 स्कूली बच्चों के भविष्य को भी संकट में डाल दिया है। परिजनों का कहना है कि बारिश होते ही स्कूल बैग और किताबें पूरी तरह भीग जाती हैं, जिससे बच्चों का स्कूल जाना असंभव हो गया है।

इस मानवीय संकट को देखते हुए, केरल राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) के अध्यक्ष अलेक्जेंडर थॉमस ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है। आयोग ने ग्रेटर कोचीन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GCDA), जिसने इन टावरों का निर्माण किया था, को इस घटना की जांच करने और एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई कार्यकर्ता थंपी सुब्रमण्यम द्वारा दायर की गई एक याचिका के बाद की गई है।

क्यों यह मामला गंभीर है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल बुनियादी ढांचे की विफलता नहीं है, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। SDPY बॉयज़ हाई स्कूल की प्रधानाध्यापिका, के.पी. प्रिया ने खुलासा किया कि एक छात्र की लगातार अनुपस्थिति के बाद जब वे उसके घर पहुंचीं, तो वहां की अस्वास्थ्यकर स्थिति देखकर दंग रह गईं। छात्रों को न केवल पढ़ाई में नुकसान हो रहा है, बल्कि वे मनोवैज्ञानिक आघात और चिंता (Anxiety) का भी सामना कर रहे हैं।

"बच्चे अपने रिसाव वाले अपार्टमेंट के कारण मनोवैज्ञानिक आघात से गुजर रहे हैं, क्योंकि वे बारिश के दौरान न तो पढ़ पाते हैं, न खा पाते हैं और न ही घर के अंदर बैठ पाते हैं।" - अभिलाष पी. परमेश्वरन, अध्यक्ष, P&T अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन

यह समस्या तब शुरू हुई जब जनवरी 2024 में 78 परिवारों को एक पुरानी कॉलोनी से इन जुड़वां टावरों में स्थानांतरित किया गया था। फरवरी 2024 की पहली बारिश के साथ ही रिसाव शुरू हो गया। निवासी पिछले 50 दिनों से नए आवासों में पुनर्वास की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे हैं।

ऐतिहासिक और तकनीकी पृष्ठभूमि

इन टावरों का निर्माण PMAY, लाइफ मिशन और कोचीन स्मार्ट मिशन लिमिटेड के संयुक्त वित्तपोषण से लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। IIT मद्रास ने संरचनात्मक दोषों के लिए सुधार उपायों की सिफारिश की थी। हालांकि, सुधार की लागत को लेकर विवाद बना हुआ है। मूल सिफारिशें लगभग 16 करोड़ रुपये की थीं, जिसे बातचीत के बाद घटाकर 6.50 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो निर्माण लागत के अनुपात में काफी अधिक है।

Did You Know?: कोच्चि के इन अपार्टमेंट्स का निर्माण सरकारी मिशनों के तहत किया गया था ताकि शहरी गरीबों को सुरक्षित आवास मिल सके, लेकिन अब ये खुद एक संकट बन गए हैं।

Frequently Asked Questions

1. रिसाव के कारण छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
छात्रों की किताबें और बैग भीग जाते हैं, जिससे वे स्कूल नहीं जा पाते और वे गंभीर मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।

2. GCDA की इसमें क्या भूमिका है?
GCDA ने इन टावरों का निर्माण किया है, और निर्माण के पांच वर्षों के भीतर किसी भी समस्या के लिए वे कानूनी रूप से जिम्मेदार हैं।