मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु नर्सिंग काउंसिल को निर्देश दिया है कि वे एक सदस्य के रिकॉर्ड से 'ट्रांसजेंडर' शब्द हटाकर उसे केवल 'पुरुष' के रूप में दर्ज करें, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के सामाजिक कलंक से बचा जा सके।
- मद्रास उच्च न्यायालय ने टी.एन. नर्सिंग काउंसिल को रिकॉर्ड में जेंडर बदलने का आदेश दिया।
- अदालत ने स्पष्ट किया कि 'ट्रांसजेंडर मेल' जैसे शब्दों का भी उपयोग नहीं किया जाएगा।
- कर्नाटक नर्सिंग काउंसिल को भेजे जाने वाले दस्तावेजों में केवल 'पुरुष' शब्द का उल्लेख होगा।
- यह फैसला जेंडर अफर्मेशन सर्जरी के बाद पहचान की गोपनीयता बनाए रखने के लिए लिया गया।
चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए तमिलनाडु नर्स और मिडवाइव्स काउंसिल (TNNMC) को निर्देश दिया है कि वह अपने एक पंजीकृत सदस्य के जेंडर को रिकॉर्ड में 'ट्रांसजेंडर' से बदलकर 'पुरुष' (Male) कर दे। न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती ने आदेश दिया कि यह परिवर्तन न केवल डिजिटल रूप से बल्कि भौतिक दस्तावेजों में भी किया जाना चाहिए।
अदालत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भविष्य के सभी संचारों में, विशेष रूप से जब सदस्य का पंजीकरण कर्नाटक राज्य नर्सिंग काउंसिल (KSNC) में स्थानांतरित किया जाए, तो केवल 'पुरुष' शब्द का उपयोग किया जाए। न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि 'ट्रांसजेंडर पुरुष' जैसे किसी भी मिश्रित शब्द का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए, ताकि सदस्य को किसी भी प्रकार के सामाजिक भेदभाव या कलंक का सामना न करना पड़े।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत गरिमा और गोपनीयता के अधिकार का मामला है। जब कोई व्यक्ति जेंडर अफर्मेशन सर्जरी (Gender Affirmation Surgery) कराता है, तो उसकी नई पहचान को बिना किसी पूर्व इतिहास के स्वीकार करना उसके मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक एकीकरण के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह निर्णय भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों और उनकी गोपनीयता की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
"पहचान का अधिकार केवल कानूनी दस्तावेज प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पिछले पहचान के निशानों को मिटाकर गरिमा के साथ जीने का अधिकार भी शामिल है।"
मामले की सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता की वकील चांदनी प्रदीप कुमार ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल ने मूल रूप से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 6 के तहत पंजीकरण कराया था। हालांकि, 2024 में जेंडर अफर्मेशन सर्जरी कराने और आधिकारिक गजट में नाम बदलने के बाद, उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट से जेंडर पहचान प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया था।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि तमिलनाडु में उनके पिछले जेंडर के कारण माहौल उनके प्रति प्रतिकूल था, जिसके कारण उन्होंने कर्नाटक में स्थानांतरित होने का निर्णय लिया। वे चाहते थे कि कर्नाटक नर्सिंग काउंसिल को भेजे गए रिकॉर्ड में उनके पिछले जेंडर का कोई उल्लेख न हो, ताकि वे एक नई शुरुआत कर सकें।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: न्यायालय ने 'ट्रांसजेंडर मेल' शब्द के उपयोग पर रोक क्यों लगाई?
उत्तर: ताकि सदस्य की पिछली पहचान का कोई संकेत न रहे और उसे नए कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के सामाजिक कलंक या भेदभाव का सामना न करना पड़े।
प्रश्न 2: यह आदेश कितने समय के भीतर लागू करना है?
उत्तर: न्यायालय ने टी.एन. नर्सिंग काउंसिल को आठ सप्ताह के भीतर सुधार करने और रिकॉर्ड स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है।