मैसूर जिले में मानसून की भारी कमी के कारण कृषि संकट गहरा गया है, जिससे लगभग ₹122 करोड़ का फसल नुकसान होने का अनुमान है। उप मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

  • मैसूर में वर्षा में 55% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
  • सूखे के कारण जिले में ₹122 करोड़ के फसल नुकसान का अनुमान है।
  • रोजगार के अवसरों में पिछले वर्ष की तुलना में 55% की कमी आई है।
  • 8 तालुकों को गंभीर रूप से सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।

कर्नाटक के मैसूर जिले में मानसून की विफलता ने किसानों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। उप मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने हाल ही में जिले के प्रभावित क्षेत्रों, विशेष रूप से हुंसुर और के.आर. नगर तालुकों का दौरा किया। उनके निरीक्षण के बाद यह स्पष्ट हुआ कि जिले में वर्षा का स्तर सामान्य से बहुत नीचे है, जिससे कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रहार हुआ है।

वर्षा का संकट और प्रभावित क्षेत्र

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून से अगस्त के अंत तक मैसूर को 310 मिमी सामान्य वर्षा प्राप्त होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 140 मिमी वर्षा ही हुई। यह 55% की भारी कमी को दर्शाता है। जून में यह कमी 56%, जुलाई में 61% और अगस्त में 45% रही। इस संकट के कारण एच.डी. कोटे, हुंसुर, के.आर. नगर, मैसूर, नंजनागुड, सालिगराम, सारागुर और टी. नरसिपुरा सहित आठ तालुकों को गंभीर रूप से सूखा प्रभावित घोषित कर दिया गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि वर्षा की यह कमी केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण रोजगार और पशुपालन के पारिस्थितिकी तंत्र को भी अस्थिर कर रही है। जब वर्षा कम होती है, तो न केवल फसलें बर्बाद होती हैं, बल्कि भूमिगत जल स्तर गिरने से रोजगार के अवसर भी कम हो जाते हैं, जिससे पलायन की समस्या बढ़ सकती है।

वर्षा की कमी और रोजगार में गिरावट का यह दोहरा संकट ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक चेतावनी है।

रोजगार और बीमा में लापरवाही: उप मुख्यमंत्री ने रोजगार सृजन में आई गिरावट पर कड़ा रुख अपनाया है। जुलाई 2026 से अब तक केवल 1.91 लाख मानव-दिवस का रोजगार उत्पन्न हुआ है, जो पिछले वर्ष के 4.33 लाख की तुलना में 55% कम है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कृषि और बागवानी विभागों को फसल बीमा नामांकन में लापरवाही बरतने के लिए फटकार लगाई। मैसूर में केवल 20,836 किसान ही बीमा के दायरे में आ पाए हैं, जो राज्य के औसत की तुलना में बेहद चिंताजनक है।

पशुपालन और पेयजल की स्थिति

पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता पर चिंता व्यक्त करते हुए, मंत्री ने बताया कि जिले में चारा लगभग 33 सप्ताह के लिए पर्याप्त है, लेकिन हुंसुर और मैसूर जैसे क्षेत्रों में यह केवल 25 सप्ताह का है। सरकार ने पशुपालन विभाग को चारा किट वितरण के लिए ₹25 करोड़ जारी किए हैं। वहीं, पेयजल संकट भी गहरा रहा है, जहाँ 14 ग्राम पंचायतों में टैंकरों और निजी बोरवेलों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है।

Did You Know?: मैसूर जिले में इस वर्ष बुवाई किए गए कुल कृषि क्षेत्र का लगभग 50% हिस्सा सूखे के कारण पूरी तरह नष्ट हो गया है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: मैसूर में कुल कितना फसल नुकसान हुआ है?
उत्तर: अनुमान के अनुसार, सूखे के कारण मैसूर जिले में लगभग ₹122 करोड़ का फसल नुकसान हुआ है।

प्रश्न 2: किन तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है?
उत्तर: एच.डी. कोटे, हुंसुर, के.आर. नगर, मैसूर, नंजनागुड, सालिगराम, सारागुर और टी. नरसिपुरा को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।