नोएडा में वियतनाम की कंपनी Green SM Limo के ड्राइवर चार्जिंग स्टेशनों पर लंबी कतारों और बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रहे हैं। कुछ ड्राइवरों को चार्जिंग स्पॉट पाने के लिए रात भर अपनी कारों में सोना पड़ रहा है।
- नोएडा में Green SM Limo ड्राइवरों को चार्जिंग स्टेशनों पर अत्यधिक देरी और लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है।
- ड्राइवर सुबह जल्दी चार्जिंग स्लॉट सुरक्षित करने के लिए रात भर कारों में सोने को मजबूर हैं।
- बुनियादी ढांचे की कमी के कारण ड्राइवर 35 ट्रिप या 580 किमी के साप्ताहिक लक्ष्य को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
- कंपनी ने अगले 2-3 महीनों में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करने की योजना बनाई है।
शहरी गतिशीलता में हरित क्रांति का वादा नोएडा में इलेक्ट्रिक टैक्सी ड्राइवरों के लिए एक कठिन वास्तविकता बन गया है। वियतनाम स्थित मोबिलिटी दिग्गज Green SM Limo का दिल्ली-एनसीआर में लॉन्च चार्जिंग बुनियादी ढांचे की भारी कमी के कारण विवादों में घिर गया है। ड्राइवरों का कहना है कि वे अपना दिन यात्रियों को ढोने के बजाय बिजली के लिए कतारों में खड़े होकर बिता रहे हैं।
सेक्टर 132 के अर्बटेक ट्रेड सेंटर में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण है। ड्राइवरों ने बताया कि बिजली कटौती के कारण चार्जिंग प्रक्रिया बार-बार बाधित होती है, जिससे उन्हें घंटों का काम फिर से शुरू करना पड़ता है। कई ड्राइवरों के लिए यह संघर्ष सुबह की पहली सवारी से बहुत पहले शुरू हो जाता है। एक ड्राइवर ने अपनी हताशा व्यक्त करते हुए बताया कि उसे एक बार चार्जिंग स्टेशन खुलने से पहले अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए रात भर कार के अंदर सोना पड़ा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक परिचालन संबंधी गलती नहीं है, बल्कि ईवी बुनियादी ढांचे की योजना बनाने में एक प्रणालीगत विफलता है। जब ड्राइवरों को अपनी गाड़ी चार्ज करने और सवारी लेने के बीच किसी एक को चुनना पड़ता है, तो ईवी मॉडल की आर्थिक व्यवहार्यता समाप्त हो जाती है। कंपनी के महत्वाकांक्षी विस्तार और उपलब्ध चार्जिंग पॉइंट्स के बीच का अंतर उन गिग वर्कर्स के लिए संकट पैदा कर रहा है जो इस सेवा की रीढ़ हैं।
वित्तीय जोखिम काफी अधिक हैं। साप्ताहिक 7,500 रुपये का भुगतान पाने के लिए, ड्राइवरों को छह दिनों में या तो 35 ट्रिप पूरी करनी होती है या 580 किमी की दूरी तय करनी होती है। चार्जिंग में लगने वाले 3.5 घंटे और लंबी कतारों के कारण, कई ड्राइवरों के पास दिन में केवल पांच से छह घंटे ही काम करने के लिए बचते हैं। यह विशेष रूप से पीक आवर्स (सुबह 7-10 और शाम 5-8) के दौरान नुकसानदेह है, जब कंपनी 16 रुपये प्रति किमी की उच्चतम दर देती है।
"इलेक्ट्रिक बेड़े का संक्रमण केवल सॉफ्टवेयर और वाहनों के दम पर सफल नहीं हो सकता; इसके लिए एक मजबूत भौतिक ऊर्जा ग्रिड की आवश्यकता है जो पीक डिमांड का अनुमान लगा सके।"
वर्तमान में, सेक्टर 132 की सुविधा मुख्य केंद्र है क्योंकि यहाँ 12 फास्ट चार्जर और 3 स्लो चार्जर हैं, जो सेक्टर 135 और 80 के अन्य स्थानों की तुलना में कहीं अधिक हैं। हालांकि, यहाँ भी दबाव इतना है कि 100-150 कारें एक ही जगह जमा हो जाती हैं, जिससे स्कूल बसों जैसे अन्य वाहनों के साथ विवाद होता है।
| चार्जिंग चरण | बैटरी प्रतिशत | अनुमानित समय |
|---|---|---|
| प्रारंभिक फास्ट चार्ज | 0% से 20% | 30 मिनट |
| बल्क चार्ज | 20% से 80% | 60 मिनट |
| टॉप-अप चार्ज | 80% से 100% | 35 मिनट |
इन शिकायतों के जवाब में, Green SM इंडिया ने कहा है कि चार्जिंग बुनियादी ढांचा उनकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि वे चरणों में पहुंच विकसित कर रहे हैं और सेक्टर 132 के दबाव को कम करने के लिए 'गोल्डन आई' में एक नई सुविधा स्थापित कर रहे हैं। हालांकि कंपनी ने अगले कुछ महीनों में विस्तार का वादा किया है, लेकिन ड्राइवरों के लिए समस्या अभी भी बनी हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: Green SM Limo ड्राइवरों के लिए साप्ताहिक लक्ष्य क्या है?
ड्राइवरों को 7,500 रुपये का भुगतान प्राप्त करने के लिए छह दिनों में या तो 35 ट्रिप पूरी करनी होती है या 580 किमी की दूरी तय करनी होती है।
प्रश्न 2: ड्राइवर सेक्टर 132 में ही क्यों जमा हो रहे हैं?
क्योंकि सेक्टर 132 में नोएडा के अन्य केंद्रों की तुलना में फास्ट चार्जर (12 यूनिट) की संख्या अधिक है।