प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ कड़े रुख और आधुनिक व्यापारिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सदस्य देशों के बीच कनेक्टिविटी और जन-संपर्क बढ़ाने का आह्वान किया।

  • आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता और सामूहिक सुरक्षा ढांचे पर जोर।
  • व्यापार और रसद (logistics) कनेक्टिविटी के आधुनिकीकरण की आवश्यकता।
  • सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक और जन-केंद्रित संबंधों को मजबूत करना।
  • क्षेत्रीय स्थिरता के लिए समावेशी विकास का समर्थन।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान एक दूरदर्शी संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने यूरेशियाई क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए एक व्यापक रोडमैप पेश किया। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है और इससे निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करना और सहयोग करना अनिवार्य है।

संबोधन के दौरान, प्रधानमंत्री ने व्यापार और लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने तर्क दिया कि डिजिटल व्यापार और आधुनिक परिवहन गलियारे न केवल आर्थिक विकास को गति देंगे, बल्कि सदस्य देशों के बीच आपसी निर्भरता और विश्वास को भी बढ़ाएंगे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का यह दृष्टिकोण एससीओ के भीतर एक संतुलित शक्ति संतुलन बनाने की कोशिश है। भारत न केवल सुरक्षा चिंताओं को उठा रहा है, बल्कि खुद को एक 'नेट सुरक्षा प्रदाता' और आर्थिक इंजन के रूप में स्थापित कर रहा है, जो चीन के प्रभुत्व वाले बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बीच एक विश्वसनीय विकल्प पेश करता है।

"एससीओ में भारत की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि नई दिल्ली अब क्षेत्रीय भू-राजनीति में केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि एक निर्णायक खिलाड़ी है।"

ऐतिहासिक रूप से, एससीओ का गठन 2001 में हुआ था और भारत 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना। भारत ने हमेशा से इस मंच का उपयोग मध्य एशिया के साथ अपने संबंधों को पुनर्जीवित करने के लिए किया है, जो सिल्क रोड के प्राचीन व्यापारिक संबंधों की याद दिलाता है।

प्रधानमंत्री ने 'पीपल-टू-पीपल' संबंधों की बात करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जब तक आम नागरिकों के बीच विश्वास नहीं बढ़ेगा, तब तक सरकारी स्तर पर किए गए समझौते पूरी तरह सफल नहीं होंगे।

क्या आप जानते हैं?: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) दुनिया के लगभग 40% जनसंख्या वाले क्षेत्र को कवर करता है, जो इसे वैश्विक राजनीति का एक अत्यंत शक्तिशाली समूह बनाता है।

Frequently Asked Questions

1. एससीओ शिखर सम्मेलन में भारत का मुख्य उद्देश्य क्या था?
भारत का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद को रोकना, कनेक्टिविटी बढ़ाना और मध्य एशियाई देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना था।

2. प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापार के संबंध में क्या सुझाव दिए?
उन्होंने व्यापारिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और लॉजिस्टिक बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर जोर दिया ताकि व्यापार लागत कम हो और दक्षता बढ़े।