उत्तरी कैरोलिना की एक 17 वर्षीय लड़की पर सैन डिएगो की एक मस्जिद में हुए घातक हमले का लाइवस्ट्रीम रिकॉर्ड करने और हमलावरों के घोषणापत्र को प्रकाशित करने का आरोप है। इस हमले में तीन लोगों की जान चली गई थी।

  • 17 वर्षीय किशोरी पर सहायता और उकसावे के जरिए हत्या का आरोप।
  • हमलावरों ने गोप्रो कैमरों का उपयोग कर नरसंहार को लाइवस्ट्रीम किया था।
  • हमले का उद्देश्य नस्लीय और यहूदी विरोधी विचारधारा से प्रेरित था।

अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना की एक 17 वर्षीय किशोरी को सैन डिएगो स्थित इस्लामिक सेंटर पर हुए भीषण हमले में सहायता करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अभियोजकों के अनुसार, इस किशोरी ने न केवल हमले के लाइवस्ट्रीम को रिकॉर्ड किया, बल्कि उन दो किशोर बंदूकधारियों के 'घोषणापत्र' (Manifesto) को भी सार्वजनिक किया, जिन्होंने 18 मई को इस कायराना वारदात को अंजाम दिया था।

फोर्सेट काउंटी के जिला अटॉर्नी जिम ओ'नील ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि किशोरी पर हत्या के तीन आरोप और साजिश रचने का एक मामला दर्ज किया गया है। उत्तरी कैरोलिना के कानून के तहत, किसी अपराध में सहायता करने वाले व्यक्ति को भी उसी तरह जिम्मेदार ठहराया जा सकता है जैसे कि मुख्य अपराधी को।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला आधुनिक युग के 'डिजिटल रेडिकलाइजेशन' के खतरनाक स्तर को दर्शाता है। जहाँ अपराधी अब केवल शारीरिक हिंसा नहीं करते, बल्कि सोशल मीडिया और लाइवस्ट्रीमिंग के जरिए अपने कृत्यों का प्रचार कर दूसरों को प्रेरित करते हैं। यह घटना दिखाती है कि कैसे दूर बैठे लोग भी तकनीकी सहायता प्रदान कर गंभीर अपराधों का हिस्सा बन सकते हैं।

इस हमले में दो किशोर हमलावरों (17 और 18 वर्ष) ने मस्जिद में अंधाधुंध फायरिंग की और बाद में आत्महत्या कर ली। जांच में खुलासा हुआ है कि हमलावरों का लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों की हत्या करना और इस तबाही को दुनिया के सामने लाइव प्रसारित करना था।

"तकनीकी सहायता प्रदान करना अब केवल एक सहायक भूमिका नहीं है, बल्कि यह आतंक के प्रसार का एक सक्रिय हथियार बन गया है।"

मस्जिद के सुरक्षा गार्ड अमीन अब्दुल्ला ने अपनी जान जोखिम में डालकर हमलावरों का सामना किया और लॉकडाउन लागू करवाया, जिससे इमारत के अंदर मौजूद लगभग 140 बच्चों की जान बच गई। इस संघर्ष में अब्दुल्ला और दो अन्य उपासकों, मंसूर काज़िहा और नादेर अवद की मृत्यु हो गई।

जांचकर्ताओं ने पाया कि हमलावरों के पास लगभग 30 बंदूकें और एक क्रॉसबो था, जो उन्होंने अपने माता-पिता से लिए थे। उनके पास एक स्थानीय यहूदी मंदिर और एक अफ्रीकी-अमेरिकी हाई स्कूल पर भी हमले की योजना थी। उनके लेखन में श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा और 2019 के क्राइस्टचर्च मस्जिद हमले के प्रति झुकाव देखा गया है।

क्या आप जानते हैं?: अमेरिका में 'Aiding and Abetting' कानून के तहत, यदि कोई व्यक्ति अपराध के समय मानसिक या भौतिक सहायता प्रदान करता है, तो उसे मुख्य अपराधी के समान सजा मिल सकती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: किशोरी पर मुख्य रूप से क्या आरोप हैं?
उत्तर: उस पर हमले का लाइवस्ट्रीम रिकॉर्ड करने, हमलावरों के घोषणापत्र को प्रकाशित करने और हत्या में सहायता करने का आरोप है।

प्रश्न 2: हमलावरों की योजना क्या थी?
उत्तर: वे मस्जिद के बाद एक यहूदी मंदिर और एक अफ्रीकी-अमेरिकी स्कूल को निशाना बनाना चाहते थे।