तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) की मानवाधिकार विंग ने के. कामराज की 124वीं जयंती पर आयोजित मिनी-मैराथन के लिए पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

  • TNCC मानवाधिकार विंग ने चेन्नई में 2.5 किमी मिनी-मैराथन के लिए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की।
  • पुलिस ने यह कहते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया कि ऐसी अनुमति केवल एनजीओ को दी जा सकती है, राजनीतिक दलों को नहीं।
  • याचिकाकर्ताओं ने सत्तारूढ़ डीएमके द्वारा आयोजित समान कार्यक्रमों का हवाला देते हुए भेदभाव का आरोप लगाया है।

तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) की मानवाधिकार विंग ने एक न्यायिक निर्देश की मांग करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया है, ताकि पुलिस को मिनी-मैराथन के लिए अनुमति देने का आदेश दिया जा सके। यह कार्यक्रम पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता के. कामराज की 124वीं जयंती मनाने के लिए आयोजित किया जाना है।

प्रस्तावित कार्यक्रम चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) पर इंजम्बक्कम और अक्कराई जंक्शन के बीच 2.5 किमी की दौड़ है। दक्षिण चेन्नई पूर्व जिला अध्यक्ष एस. सेलवाकुमार द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार, मैराथन इंजम्बक्कम के वर्ल्ड पीस टेम्पल से शुरू होगी और अक्कराई जंक्शन पर यू-टर्न लेकर वापस उसी स्थान पर समाप्त होगी।

याचिका में उल्लेख किया गया है कि टीएनसीसी अध्यक्ष मणिकम टैगोर, कांग्रेस पार्टी के दो मंत्री, विधायक और पार्टी के वरिष्ठ नेता इस मैराथन में भाग लेने के लिए सहमत हुए हैं। आयोजकों ने पुलिस को आश्वासन दिया कि कार्यक्रम सुबह 5:30 से 8:30 बजे के बीच अत्यंत अनुशासन के साथ आयोजित किया जाएगा, ताकि आम जनता या यातायात में कोई बाधा न आए।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह कानूनी लड़ाई केवल एक परमिट का मामला नहीं है; बल्कि यह राजनीतिक संस्थाओं और राज्य कानून प्रवर्तन के बीच तनाव को उजागर करती है। विवाद का मुख्य बिंदु पुलिस द्वारा उद्धृत 'केवल एनजीओ' वाला नियम है। टीएनसीसी का तर्क है कि यदि राजनीतिक दलों पर ऐसी रोक है, तो सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) द्वारा आयोजित वार्षिक 'कलैग्नर मेमोरियल मैराथन' को भी प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। यह मामला 'चयनात्मक प्रवर्तन' (selective enforcement) के मुद्दे को न्यायिक चर्चा में लाता है।

आवेदक की संगठनात्मक स्थिति के आधार पर अनुमति से इनकार करना, जबकि सत्तारूढ़ दल के सहयोगियों के लिए समान कार्यक्रमों की अनुमति देना, लोकतांत्रिक ढांचे में प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाता है।

मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने सरकारी वकील को गुरुवार (3 सितंबर) तक निर्देश प्राप्त करने का आदेश दिया है। अब अदालत को यह तय करना है कि पुलिस का इनकार सत्ता का मनमाना उपयोग है या वास्तव में कोई सुरक्षा चिंता।

क्या आप जानते हैं?: के. कामराज को भारतीय राजनीति के 'किंगमेकर' के रूप में जाना जाता है और उन्हें तमिलनाडु के स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना (mid-day meal scheme) में क्रांति लाने का श्रेय दिया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: पुलिस ने मैराथन की अनुमति क्यों नहीं दी?
पुलिस ने दावा किया कि इस तरह के आयोजनों की अनुमति केवल गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को दी जा सकती है, राजनीतिक दलों को नहीं।

प्रश्न 2: टीएनसीसी के भेदभाव के दावे का आधार क्या है?
TNCC ने तर्क दिया कि सत्तारूद्दीन डीएमके पार्टी हर साल बिना किसी प्रतिबंध के कलैग्नर मेमोरियल मैराथन का आयोजन करती है।