केरल कैबिनेट ने 18 शिक्षक पीएससी रैंक सूचियों की वैधता छह महीने के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे उम्मीदवारों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहाँ रैंक धारक इसे राहत मान रहे हैं, वहीं विपक्षी शिक्षक संघों ने इसे उम्मीदवारों के साथ 'धोखा' करार दिया है।
- केरल कैबिनेट ने 18 पीएससी शिक्षक रैंक सूचियों की वैधता 6 महीने के लिए बढ़ाई।
- यह निर्णय प्री-प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर के शिक्षकों पर लागू होगा।
- UDF समर्थित संगठनों ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि KSTA और AKSTU ने इसे 'धोखा' बताया है।
- मुख्य विवाद नए पदों के सृजन और शिक्षक-छात्र अनुपात को लेकर है।
तिरुवनंतपुरम: केरल सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाते हुए 18 सार्वजनिक सेवा आयोग (PSC) शिक्षक रैंक सूचियों की वैधता को छह महीने के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय उन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी रैंक सूचियाँ इस वर्ष सितंबर, अक्टूबर और नवंबर में समाप्त होने वाली थीं। इस कदम ने राज्य के राजनीतिक और शैक्षिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
रैंक धारकों और UDF से संबद्ध शिक्षक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। एर्नाकुलम की एक हाई स्कूल अंग्रेजी रैंक धारक, स्वाति जी., ने इस कदम को प्रशासनिक देरी से प्रभावित उम्मीदवारों के लिए एक 'करुणापूर्ण और उत्साहजनक' कदम बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले सरकार के कार्यकाल के दौरान व्याप्त अनिश्चितता के बाद, इस निर्णय ने उम्मीदवारों में नया आत्मविश्वास जगाया है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल वैधता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पदों के सृजन और प्रशासनिक दक्षता से गहराई से जुड़ा है। यदि सरकार अतिरिक्त पदों को स्वीकृत नहीं करती है, तो रैंक सूची का विस्तार केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगा।
रैंक सूचियों का विस्तार तब तक बेमानी है जब तक कि सरकार वास्तविक रिक्तियों और नए पदों के सृजन के लिए ठोस कदम नहीं उठाती।
दूसरी ओर, केरल स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (KSTA) और ऑल केरला स्कूल टीचर्स यूनियन (AKSTU) ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। KSTA के महासचिव टीकेए शफी ने आरोप लगाया कि सरकार उम्मीदवारों को 'धोखा' दे रही है क्योंकि शैक्षणिक वर्ष के बीच में नए पदों को मंजूरी देना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने मांग की कि शिक्षक-छात्र अनुपात को कम किया जाए ताकि नए पदों का निर्माण हो सके।
AKSTU के महासचिव ओ.के. जयकृष्णन ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि रैंक सूचियों को उन पदों के लिए बढ़ाया जा रहा है जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पदों में गिरावट दर्ज की गई है, जो इस विवाद को और अधिक जटिल बनाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
केरल में पीएससी नियुक्तियों और शिक्षक भर्ती को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। हाई कोर्ट के निर्देशों के बावजूद, कई श्रेणियों में शिक्षकों के कैडर का निर्माण और पदों का निर्धारण प्रक्रिया में काफी देरी देखी गई है, जिससे हजारों योग्य उम्मीदवार बेरोजगारी के संकट से जूझ रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. किन शिक्षकों की रैंक सूची की वैधता बढ़ाई गई है?
प्री-प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर के शिक्षकों की 18 पीएससी रैंक सूचियों की वैधता बढ़ाई गई है।
2. विरोध करने वाले शिक्षक संघों की मुख्य मांग क्या है?
उनका कहना है कि केवल वैधता बढ़ाने के बजाय सरकार को शिक्षक-छात्र अनुपात कम करके नए पदों का सृजन करना चाहिए।