कोलकाता के कई लोकप्रिय रेस्तरां और फूड कोर्ट में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी में भारी मात्रा में सड़ा हुआ मांस, फंगस लगा चिकन और खराब झींगे बरामद किए गए हैं। दुर्गा पूजा से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई ने शहर के खाद्य सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- कोलकाता के कई रेस्तरां और फूड कोर्ट में सड़ा हुआ मांस और झींगे जब्त किए गए।
- दुर्गा पूजा से पहले हुई इस छापेमारी ने खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
- बदुरिया और टांगरा जैसे इलाकों में भारी मात्रा में दूषित खाद्य सामग्री मिली।
- 2018 के कारकस मीट घोटाले की यादें ताजा हो गई हैं।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया छापेमारी ने शहर के खान-पान के शौकीनों को झकझोर कर रख दिया है। पिछले तीन दिनों से चल रही इस कार्रवाई में कई प्रसिद्ध रेस्तरां और फूड कोर्ट से किलो के हिसाब से सड़ा हुआ मांस, फंगस लगा चिकन और बासी झींगे बरामद किए गए हैं। यह छापेमारी राज्यव्यापी 'खाद्य सुरक्षा सप्ताह' के हिस्से के रूप में की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र के FDA कमिश्नर तुकाराम मुंधे द्वारा शुरू किए गए सख्त प्रवर्तन अभियान का असर अब बंगाल में भी दिखने लगा है। मुंधे के कड़े रुख के बाद देशभर में खाद्य सुरक्षा नियमों को लेकर सख्ती बढ़ी है। कोलकाता के स्टार मॉल जैसे व्यस्त स्थानों पर भी निरीक्षण के दौरान एक्सपायर्ड फूड और बिना लाइसेंस वाले आउटलेट पाए गए हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह छापेमारी केवल स्वच्छता का मुद्दा नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है। दुर्गा पूजा, जो बंगाल का सबसे बड़ा उत्सव है, में बस एक महीना बचा है। इस दौरान रेस्तरां में ग्राहकों की भीड़ चरम पर होती है, ऐसे में दूषित भोजन का मिलना बड़े पैमाने पर फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है।
खाद्य सुरक्षा में लापरवाही सीधे तौर पर मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है, खासकर त्योहारों के सीजन में।
छापेमारी के दौरान चौंकाने वाले दृश्य सामने आए हैं। टांगरा (कोलकाता का चाइनाटाउन) के एक प्रसिद्ध चीनी रेस्तरां में लगभग 500 किलो बासी कच्चा चिकन और झींगे पाए जाने के बाद उसे अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया गया। वहीं, बदुरिया में एक रेस्तरां से 40 किलो सड़ा हुआ मांस बरामद किया गया, जिससे 2018 के कुख्यात 'कारकस मीट घोटाले' की यादें ताजा हो गई हैं।
2018 का वह घोटाला तब हुआ था जब डंपिंग ग्राउंड से मृत जानवरों के मांस को रसायनों (जैसे फॉर्मेलिन) के जरिए संरक्षित कर रेस्तरां में बेचा जा रहा था। वर्तमान छापेमारी में भी स्वच्छता के मानकों की भारी अनदेखी देखी गई है, जहाँ कुछ किचन में कॉकरोच घूमते हुए पाए गए।
Frequently Asked Questions
1. छापेमारी का मुख्य कारण क्या है?
राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'खाद्य सुरक्षा सप्ताह' के तहत मिलावट और अस्वच्छ भोजन की जांच की जा रही है।
2. क्या रेस्तरां पर कोई कार्रवाई की गई है?
हाँ, कई रेस्तरां के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं और कुछ को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।