सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट डेवलपर्स को स्पष्ट किया कि प्रोजेक्ट ब्रोशर केवल विज्ञापन नहीं, बल्कि खरीदारों को किए गए वादे हैं। गुरुग्राम के DLF प्राइमस प्रोजेक्ट में 24 मीटर चौड़ी सड़क के वादे को पूरा न करने पर कोर्ट ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
- सुप्रीम कोर्ट ने ब्रोशर को केवल मार्केटिंग नहीं, बल्कि खरीदारों को किए गए वादे माना।
- DLF प्राइमस प्रोजेक्ट में 24 मीटर चौड़ी सड़क का वादा पूरा नहीं हुआ, जिससे कोर्ट ने हस्तक्षेप किया।
- सीबीआई की जांच ने दिखाया कि योजना में दिखाए गए दो‑तीन हिस्से वास्तविकता से काफी अलग थे।
सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट डेवलपर्स को स्पष्ट किया कि प्रोजेक्ट ब्रोशर केवल विज्ञापन नहीं, बल्कि खरीदारों को किए गए वादे हैं। यह टिप्पणी DLF होम डेवलपर्स के "द प्राइमस" प्रोजेक्ट, सेक्टर 82A, गुरुग्राम के विवाद के दौरान की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क के बारे में क्या पाया
कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मूल ब्रोशर में दिखाए गए 24 मीटर चौड़ी सड़क का अधिकांश हिस्सा न तो मौजूद था न ही योजना के अनुसार बना था। 147 मीटर की कुल लंबाई में से लगभग 100 मीटर को हरा क्षेत्र या पार्किंग के रूप में उपयोग किया जा रहा था।
DLF ने खरीदारों को क्या वादा किया था
DLF ने 2012 से "द प्राइमस" को प्रीमियम आवासीय प्रोजेक्ट के रूप में विज्ञापित किया, जिसमें दो 24‑मीटर चौड़ी एक्सेस रोड, बैंकेट हॉल, टेनिस कोर्ट और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाओं का वादा किया गया था। कई खरीदारों ने बाद में बताया कि इन सुविधाओं में से कई वादे वास्तविकता में नहीं मिले।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this ruling could set a precedent, forcing developers nationwide to align promotional material with on‑ground reality, thereby protecting homebuyers from misleading marketing tactics.
"सुप्रीम कोर्ट की यह चेतावनी रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"
Frequently Asked Questions
- सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डरों को किस बात की चेतावनी दी?
- DLF के "द प्राइमस" प्रोजेक्ट में किस प्रमुख सुविधा का वादा पूरा नहीं हुआ?