छत्रपति संभाजीनगर के एशियन अस्पताल में एसी शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई, जिससे हड़कंप मच गया। राहत कार्य के दौरान 9 नवजात शिशुओं सहित कुल 58 मरीजों को सुरक्षित निकाला गया।

  • छत्रपति संभाजीनगर के एशियन अस्पताल के NICU में शॉर्ट सर्किट से लगी आग।
  • 9 नवजात शिशुओं सहित कुल 58 मरीजों को सुरक्षित बचाया गया।
  • आग पर काबू पाने के लिए 5 दमकल गाड़ियों को मौके पर भेजा गया।
  • सभी नवजात शिशुओं को अलग-अलग सरकारी और निजी अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया।

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित आकाशवाणी चौक क्षेत्र के एशियन अस्पताल में शुक्रवार तड़के एक भयानक अग्निकांड की घटना सामने आई। शुक्रवार, 4 सितंबर को सुबह लगभग 2:20 बजे अस्पताल के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जांच के अनुसार, आग लगने का मुख्य कारण NICU में लगे एक एयर-कंडीशनिंग (AC) यूनिट में शॉर्ट सर्किट होना बताया जा रहा है।

जैसे ही आग की लपटें उठीं, अस्पताल के कर्मचारियों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। अस्पताल प्रशासन ने बिना समय गंवाए आपातकालीन निकासी प्रक्रिया शुरू कर दी। इस दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण थी, क्योंकि अस्पताल की पहली मंजिल पर कई गंभीर मरीज भर्ती थे।

बचाव अभियान और मरीजों का स्थानांतरण

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उस समय NICU में 9 नवजात शिशु उपचाराधीन थे। अस्पताल कर्मचारियों, दमकल कर्मियों और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक साहसी बचाव अभियान चलाया और सभी नौ शिशुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। आग की तीव्रता को देखते हुए लगभग 30 एम्बुलेंस तैनात की गईं ताकि मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

मरीजों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए, नवजात शिशुओं को विभिन्न अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया: 5 शिशुओं को सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (GHATI), 3 को MGM अस्पताल और 1 को संजीवनी अस्पताल में भेजा गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि अस्पतालों में विद्युत सुरक्षा मानकों की अनदेखी जानलेवा साबित हो सकती है। विशेष रूप से NICU जैसे संवेदनशील वार्डों में, जहाँ जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर केवल कुछ सेकंड का होता है, वहां बिजली के उपकरणों का नियमित रखरखाव अनिवार्य है। यह घटना स्वास्थ्य संस्थानों में अग्नि सुरक्षा प्रोटोकॉल की तत्काल समीक्षा की आवश्यकता पर बल देती है।

अस्पताल के संवेदनशील वार्डों में अग्निशमन प्रणालियों और बैकअप पावर की निरंतर जांच जीवन रक्षक साबित होती है।

घटना की सूचना मिलते ही पांच दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और लगभग 10 से 15 मिनट के भीतर आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया। जवाहर नगर पुलिस स्टेशन और RCP के कर्मियों ने निकासी कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अस्पताल की पहली मंजिल पर कुल 58 मरीज थे, जिनमें 36 सामान्य वार्ड में, 13 विशेष कमरों में और 9 NICU में थे।

Did You Know?: अस्पताल के वार्डों में आग लगने की स्थिति में 'क्रेडल-टू-क्रेडल' (Cradle-to-Cradle) निकासी योजना सबसे महत्वपूर्ण होती है ताकि नवजात शिशुओं को बिना किसी झटके के निकाला जा सके।

Frequently Asked Questions

1. आग लगने का संभावित कारण क्या था?
प्रारंभिक जांच के अनुसार, NICU में एक एयर-कंडीशनिंग यूनिट में शॉर्ट सर्किट होने के कारण आग लगी थी।

2. क्या इस घटना में किसी की जान गई?
नहीं, राहत कार्य के दौरान सभी 58 मरीजों, जिनमें 9 नवजात शिशु शामिल थे, को सुरक्षित बचा लिया गया।