केरल सरकार द्वारा सिम कार्ड बदलने के फैसले के बावजूद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुराने स्मार्टफोन और तकनीकी खामियों से जूझ रही हैं। कार्यकर्ताओं का दावा है कि पुराने फोन पर पोषण ट्रैकर ऐप काम नहीं कर रहा है, जिससे सरकारी डेटा अपलोड करना मुश्किल हो गया है।

  • WCD विभाग ने 27,296 आंगनवाड़ी सिम कार्ड्स को नए सर्विस प्रोवाइडर पर स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।
  • कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुराने सरकारी स्मार्टफोन Poshan Tracker ऐप के नए अपडेट्स को सपोर्ट नहीं कर रहे हैं।
  • डेटा अपलोड करने के लिए कार्यकर्ताओं को अपने व्यक्तिगत फोन का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे प्राइवेसी और डिवाइस परफॉर्मेंस की समस्या आ रही है।
  • यूनियन ने सरकार से स्मार्टफोन के बजाय टैबलेट उपलब्ध कराने की मांग की है।

केरल के महिला एवं बाल विकास (WCD) विभाग ने राज्य की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है, जिसके तहत आधिकारिक सिम कनेक्शनों को वर्तमान सेवा प्रदाता से वैकल्पिक टेलीकॉम प्रदाताओं में स्थानांतरित करने की मंजूरी दी गई है। WCD निदेशक वी. विग्नेश्वरी के पत्र के आधार पर लिए गए इस निर्णय के अनुसार, 27,296 कनेक्शनों को बदला जाएगा, जबकि 5,819 कनेक्शन उन क्षेत्रों में बरकरार रखे जाएंगे जहां कवरेज पर्याप्त है।

यह कदम राज्यव्यापी सर्वेक्षण के बाद उठाया गया है, जिसमें 33,115 आंगनवाड़ियों में नेटवर्क उपलब्धता और टैरिफ लागत का मूल्यांकन किया गया था। हालांकि, जमीनी स्तर पर कार्यरत महिलाओं का कहना है कि केवल सिम बदलना समस्या का समाधान नहीं है। असली चुनौती उन पुराने स्मार्टफोन्स की है जो सरकार ने कुछ साल पहले प्रदान किए थे।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the digitalization of grassroots healthcare and nutrition monitoring is failing not due to a lack of software, but due to 'hardware obsolescence'. When the government mandates the use of the Poshan Tracker app for everything from morning snacks to growth monitoring, providing outdated hardware creates a systemic bottleneck that compromises the accuracy of national health data.

कार्यकर्ताओं के अनुसार, आंगनवाड़ी की हर गतिविधि—जैसे सुबह का नाश्ता, गर्म पका हुआ भोजन, प्री-स्कूल उपस्थिति और चेहरे की पहचान प्रणाली (FRS) के माध्यम से राशन वितरण—को ऐप के माध्यम से अपलोड करना अनिवार्य है। चूंकि सरकारी फोन पुराने हैं, ऐप डाउनलोड नहीं होता या बार-बार क्रैश हो जाता है।

"तकनीकी बुनियादी ढांचे के बिना डिजिटल गवर्नेंस केवल कागजों पर सीमित रह जाती है; जमीनी कार्यकर्ताओं को आधुनिक उपकरण देना अनिवार्य है।"

मजबूरी में, कार्यकर्ता अपने निजी फोन का उपयोग कर रही हैं। लेकिन इन फोन में व्यक्तिगत डेटा और व्हाट्सएप जैसे ऐप्स होने के कारण, पोषण ट्रैकर ऐप चलाने पर फोन हैंग होने लगता है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐप चलाने के लिए उन्हें अपने निजी डेटा को हटाना पड़ता है, जो कि उनके व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन है। इसके अलावा, रिचार्ज भत्तों में देरी ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।

केरल आंगनवाड़ी और क्रेच वर्कर्स यूनियन (INTUC) की राज्य अध्यक्ष कृष्णा वेणी जी. शर्मा ने स्पष्ट किया है कि समस्या इंटरनेट से ज्यादा हार्डवेयर की है। उन्होंने महिला एवं बाल विकास मंत्री बिंदु कृष्णा से मुलाकात कर टैबलेट की मांग की है, क्योंकि टैबलेट डेटा अपलोड और शैक्षिक वीडियो देखने के लिए अधिक उपयुक्त हैं।

क्या आप जानते हैं? पोषण ट्रैकर ऐप भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य कुपोषण को समाप्त करने के लिए वास्तविक समय (Real-time) में डेटा मॉनिटरिंग करना है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सिम कार्ड बदलने से संतुष्ट क्यों नहीं हैं?
उत्तर: क्योंकि सिम बदलने से नेटवर्क तो सुधर सकता है, लेकिन उनके पास मौजूद पुराने स्मार्टफोन Poshan Tracker ऐप के नवीनतम संस्करणों को चलाने में सक्षम नहीं हैं।

प्रश्न 2: कार्यकर्ताओं ने टैबलेट की मांग क्यों की है?
उत्तर: टैबलेट की बड़ी स्क्रीन और बेहतर प्रोसेसिंग पावर डेटा अपलोड करने, पीडीएफ पढ़ने और ई-लर्निंग वीडियो देखने के लिए स्मार्टफोन से अधिक प्रभावी होते हैं।