एक 78 वर्षीय सेवानिवृत्त नर्स को ब्रेक्सिट के बाद निवास आवेदन की समय सीमा चूकने के कारण स्वीडन से निर्वासन (deportation) का सामना करना पड़ रहा है, जिससे नौकरशाही और मानवीय संवेदनाओं के बीच बहस छिड़ गई है।
- 78 वर्षीय जॉयस थॉमस को 22 साल तक रहने के बाद स्वीडन से निकाला जा सकता है।
- यह संकट ब्रेक्सिट के बाद निवास आवेदन (31 दिसंबर 2021 तक) न भरने के कारण उत्पन्न हुआ है।
- 2021 और 2025 के बीच स्वीडन ने लगभग 2,490 ब्रिटिश नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया।
- स्वीडिश प्रवासन मंत्री अब प्रभावित नागरिकों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने के उपायों की समीक्षा कर रहे हैं।
जॉयस थॉमस, एक 78 वर्षीय सेवानिवृत्त नर्स, इस समय एक मानसिक प्रताड़ना से गुजर रही हैं। स्वीडन में दो दशक से अधिक समय तक अपना जीवन बिताने के बाद, अब उन्हें देश से निकाले जाने की धमकी दी जा रही है। इसका कारण एक तकनीकी त्रुटि है: यूनाइटेड किंगडम के यूरोपीय संघ छोड़ने (Brexit) के बाद निवास के लिए औपचारिक आवेदन न करना।
थॉमस 22 साल पहले अपने पति के साथ स्वीडन आई थीं, जिनकी तीन साल पहले कैंसर से मृत्यु हो गई। वर्षों तक वे शांति से रहीं, उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि ब्रेक्सिट के कारण उन्हें अपनी निवास स्थिति बनाए रखने के लिए आवेदन करना होगा। उन्हें 2023 में देश में पुनः प्रवेश करने के प्रयास के दौरान पहली बार इस नियम के बारे में पता चला।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला संक्रमण काल के दौरान यूरोपीय संघ के सदस्य देशों और गैर-यूरोपीय संघ के नागरिकों के बीच संचार की गंभीर विफलता को दर्शाता है। जबकि कानून समय सीमा के सख्त पालन की मांग करता है, लेकिन पोते-पोतियों से अलग होने और पति की कब्र पर न जा पाने का मानवीय दर्द प्रशासनिक कानून में संवेदनशीलता की कमी को उजागर करता है। यह केवल एक मामला नहीं है, बल्कि 'हार्ड ब्रेक्सिट' का परिणाम है जहाँ हजारों जिंदगियों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित कर दिया गया है।
कठोर प्रवासन कोटा और भू-राजनीतिक बदलावों का संगम अक्सर बुजुर्गों जैसे सबसे कमजोर वर्गों को कानूनी शून्य में छोड़ देता है।
इस समस्या का पैमाना काफी बड़ा है। यूरोस्टेट (Eurostat) के आंकड़ों के अनुसार, 2021 और 2025 के बीच, लगभग 2,490 ब्रिटिश नागरिकों को स्वीडन छोड़ने का आदेश दिया गया। यह सभी 27 यूरोपीय संघ के सदस्य देशों से निकाले गए कुल ब्रिटिश नागरिकों का लगभग एक तिहाई है। इसके अलावा, प्रवासन एजेंसी Migrationsverket ने खुलासा किया कि ब्रेक्सिट के बाद से 458 ब्रिटिश नागरिकों को जबरन निकाला गया है।
स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि ऐसे अन्य मामले भी सामने आए हैं, जिनमें डिमेंशिया और पार्किंसंस से पीड़ित एक पिता को भी 20 साल बाद देश से निकालने की धमकी दी गई है। इन घटनाओं ने स्वीडिश सरकार को अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है।
| इकाई | स्थिति/डेटा |
|---|---|
| स्वीडन छोड़ने का आदेश पाने वाले ब्रिटिश नागरिक (2021-2025) | ~2,490 |
| यूरोपीय संघ-27 से निकाले गए कुल ब्रिटिश नागरिक | ~7,500 |
| स्वीडन से जबरन निकाले गए ब्रिटिश नागरिक | 458 |
स्वीडिश प्रवासन मंत्री जोहान फोर्सेल ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया है और कहा है कि वर्तमान ढांचा पिछली सरकार द्वारा लागू किया गया था। उन्होंने संकेत दिया है कि सरकार प्रक्रिया को आसान बनाने के उपायों की जांच करेगी, और जोर दिया कि यूके-स्वीडन साझेदारी के महत्व को देखते हुए नियमों को "उदारता" से लागू किया जाना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जॉयस थॉमस को स्वीडन से क्यों निकाला जा रहा है?
उन्होंने दिसंबर 2021 में समाप्त हुई ब्रेक्सिट के बाद की संक्रमण अवधि के दौरान औपचारिक निवास परमिट के लिए आवेदन नहीं किया था।
क्या स्वीडिश सरकार अपनी नीति बदल रही है?
प्रवासन मंत्री जोहान फोर्सेल ने कहा है कि वे इस मुद्दे की समीक्षा कर रहे हैं ताकि प्रभावित लोगों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके।