दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निकायों को आवारा कुत्तों में रेबीज के उन्मूलन के लिए एक व्यापक कार्ययोजना और स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया गया है।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने आवारा कुत्तों से होने वाले रेबीज को खत्म करने के लिए सरकार से एक्शन प्लान मांगा है।
- MCD और NDMC को नसबंदी और टीकाकरण अभियानों पर स्टेटस रिपोर्ट देनी होगी।
- अदालत का लक्ष्य है कि प्रत्येक निकाय अपने क्षेत्र का कम से कम एक वार्ड 'रेबीज-मुक्त' बनाए।
- यह पहल 2030 तक भारत से रेबीज को समाप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य का हिस्सा है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे बन चुके रेबीज के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली सरकार से राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों में रेबीज के उन्मूलन के लिए एक ठोस कार्ययोजना पेश करने को कहा है। जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और व्यवस्थागत हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) ने 2030 तक भारत से कुत्तों के माध्यम से फैलने वाले रेबीज को खत्म करने के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया है। अदालत अब यह सुनिश्चित कर रही है कि ये दिशानिर्देश केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर लागू हों।
नगर निगम दिल्ली (MCD) और नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) को विशेष रूप से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया है। MCD ने बताया कि अगस्त और सितंबर के दौरान आनंद विहार वार्ड में 43 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया गया, जबकि NDMC ने 615 कुत्तों के टीकाकरण और स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी। हालांकि, अदालत ने पकड़े गए कुत्तों की कुल संख्या पर अधिक सटीक डेटा मांगा है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह न्यायिक हस्तक्षेप इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रेबीज एक ऐसी बीमारी है जो 100% घातक है लेकिन 100% रोकथाम योग्य है। रैंडम कैंपों के बजाय 'वार्ड-विशिष्ट' रेबीज-मुक्त लक्ष्य की ओर बढ़ना सार्वजनिक स्वास्थ्य के सूक्ष्म-प्रबंधन (micro-management) की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि MCD और NDMC एक वार्ड को सफलतापूर्वक रेबीज-मुक्त बना लेते हैं, तो यह पूरे शहर के लिए एक मॉडल बनेगा।
"बेतरतीब पशु नियंत्रण से हटकर एक संरचित, डेटा-संचालित उन्मूलन योजना की ओर बढ़ना ही शहरी सुरक्षा और पशु कल्याण को एक साथ सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है।"
यह मामला हाईकोर्ट द्वारा सुओ मोटो (स्वतः संज्ञान) लिया गया है, जो 19 मई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के बाद हुआ। शीर्ष अदालत ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवारा जानवरों से निपटने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का निर्देश दिया था।
| संस्था | हालिया कार्रवाई | अदालत की मांग |
|---|---|---|
| MCD | 43 कुत्तों की नसबंदी/टीकाकरण (आनंद विहार) | पकड़े गए कुत्तों का डेटा और 1 रेबीज-मुक्त वार्ड |
| NDMC | 615 कुत्तों का टीकाकरण और जागरूकता अभियान | पकड़े गए कुत्तों का डेटा और 1 रेबीज-मुक्त वार्ड |
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर के लिए तय की है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि वे कैंप लगाना जारी रखेंगे और कम से कम एक वार्ड को पूरी तरह से रेबीज-मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल करेंगे।
प्रश्न 1: अदालत द्वारा उल्लेखित एक्शन प्लान का अंतिम लक्ष्य क्या है?
इसका लक्ष्य सामूहिक टीकाकरण और नसबंदी के माध्यम से 2030 तक भारत से कुत्तों द्वारा फैलने वाले रेबीज को पूरी तरह समाप्त करना है।
प्रश्न 2: दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) क्यों लिया?
अदालत ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया, ताकि राज्य सरकारें आवारा पशु प्रबंधन के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करें।