दिल्ली हाईकोर्ट ने आवारा कुत्तों में रेबीज को 2030 तक समाप्त करने की कार्ययोजना पर दिल्ली सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है, जो सुप्रीम कोर्ट के पशु जन्म नियंत्रण निर्देशों के अनुरूप है।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने 2030 तक रेबीज उन्मूलन योजना पर GNCTD से प्रतिक्रिया मांगी है।
- अदालत सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों के प्रबंधन के संबंध में दिए गए निर्देशों की निगरानी कर रही है।
- MCD और NDMC को नसबंदी और टीकाकरण शिविरों के पायलट प्रोजेक्ट पर रिपोर्ट देनी होगी।
- देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक पूर्ण कार्यात्मक पशु जन्म नियंत्रण (ABC) केंद्र स्थापित करना अनिवार्य है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य और पशु कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह 2030 तक आवारा कुत्तों से रेबीज को समाप्त करने की कार्ययोजना को लागू करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर अपना जवाब दाखिल करे। जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने यह निर्देश एमिकस क्यूरी और पशु कल्याण कार्यकर्ता गौरी मौलेखी के सुझावों के बाद दिए हैं।
अदालत ने दिल्ली सरकार (GNCTD) को निर्देश प्राप्त करने और एमिकस क्यूरी द्वारा की गई सिफारिशों और कार्ययोजना पर प्रतिक्रिया दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। यह कानूनी कार्यवाही एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (PIL) का हिस्सा है, जिसे हाईकोर्ट ने इस साल मई में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए दर्ज किया था।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी विकास और आवारा पशुओं की बढ़ती आबादी ने भारतीय महानगरों में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है। 'पशु जन्म नियंत्रण' (ABC) के लिए न्यायिक दबाव केवल पशु अधिकारों के बारे में नहीं है, बल्कि रेबीज जैसी घातक बीमारी की घटनाओं को कम करने की एक रणनीतिक आवश्यकता है। जिला स्तर पर बुनियादी ढांचे को अनिवार्य करके, अदालत प्रतिक्रियात्मक उपायों के बजाय एक व्यवस्थित और निवारक स्वास्थ्य मॉडल अपनाने की कोशिश कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट के व्यापक निर्देश के अनुसार, देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक पूर्ण कार्यात्मक पशु जन्म नियंत्रण केंद्र स्थापित करना आवश्यक है। इसके अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जनसंख्या घनत्व और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर बुनियादी ढांचे का विस्तार करने के लिए कहा गया है ताकि आवारा कुत्तों की आबादी को मानवीय और प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सके।
"2030 तक रेबीज का उन्मूलन तभी संभव है जब सरकार छिटपुट टीकाकरण अभियानों से हटकर नसबंदी के लिए एक स्थायी और स्केलेबल बुनियादी ढांचे की ओर बढ़े।"
मामले की गंभीरता को देखते हुए, दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले नगर निगम दिल्ली (MCD) और नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) को अपने क्षेत्रों में एक-एक वार्ड की पहचान करने और आवारा कुत्तों के नसबंदी और टीकाकरण के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया था।
मंगलवार को, अदालत ने MCD और NDMC को इस संबंध में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी, जिससे राजधानी में रेबीज उन्मूलन प्रयासों की गति तय होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: अदालत के निर्देश का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली सरकार 2030 तक टीकाकरण और नसबंदी के माध्यम से आवारा कुत्तों में रेबीज को समाप्त करने के लिए एक संरचित कार्ययोजना लागू करे।
प्रश्न 2: पशु जन्म नियंत्रण (ABC) केंद्रों की क्या भूमिका है?
ABC केंद्रों का उद्देश्य आवारा कुत्तों की आबादी को मानवीय रूप से नियंत्रित करने के लिए उनकी नसबंदी करना और रेबीज के प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक टीकाकरण प्रदान करना है।