भारत और चीन ने अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में तनाव के बीच दो दिवसीय सैन्य स्तर की वार्ता की है। यह बैठक राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से ठीक पहले हुई है।
- भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश के वाचा और दामई क्षेत्रों में दो दिवसीय सैन्य वार्ता आयोजित की गई।
- यह बैठक ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताक्सिंग क्षेत्र में जारी तनाव के बीच हुई है।
- वार्ता में भारतीय सेना की III कोर (Spear Corps) के लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने नेतृत्व किया।
- यह कूटनीतिक प्रयास राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 12-13 सितंबर को होने वाली संभावित भारत यात्रा से पहले महत्वपूर्ण है।
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार को पुष्टि की कि भारत और चीन ने रविवार और सोमवार को पूर्वी क्षेत्र में Corps Commander-level सैन्य वार्ता की। यह बैठक अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताक्सिंग क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव के बीच आयोजित की गई, जो सीमा विवादों को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह 'वरिष्ठ उच्चतम सैन्य कमांडर-स्तरीय ध्वज बैठक' दो लगातार दिनों तक चली। पहली बैठक रविवार (6 सितंबर) को भारतीय पक्ष के वाचा में और दूसरी बैठक सोमवार (7 सितंबर) को चीनी पक्ष के दामई में हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी तरह का एक तंत्र पश्चिमी क्षेत्र (लद्दाख) में भी सक्रिय है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बैठक केवल एक नियमित सैन्य चर्चा नहीं है, बल्कि एक व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है। अगस्त 2025 और 2026 के बीच विशेष प्रतिनिधियों (Special Representatives) के बीच हुई समझ और बीजिंग व नई दिल्ली में WMCC बैठकों के बाद यह कदम उठाया गया है। यह दर्शाता है कि दोनों देश जमीनी स्तर पर तनाव कम करने के लिए गंभीर हैं ताकि उच्च-स्तरीय राजनीतिक मुलाकातों का मार्ग प्रशस्त हो सके।
इस वार्ता का नेतृत्व भारतीय सेना की III कोर (जिसे Spear Corps भी कहा जाता है) के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने किया। यह बैठक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25 अगस्त को बीजिंग में हुई चर्चा के बाद हुई है।
"सीमा पर सैन्य स्तर की वार्ताएं राजनीतिक समाधान के लिए आवश्यक आधार तैयार करती हैं, लेकिन वास्तविक स्थिरता केवल पूर्ण विसैन्यीकरण (disengagement) से ही आएगी।"
ऐतिहासिक रूप से, भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव 2020 के बाद से बढ़ा है। पूर्वी लद्दाख के चुशुल-मोल्डो बॉर्डर पॉइंट पर अब तक 23 दौर की Corps Commander स्तर की बैठकें हो चुकी हैं। अब इसी तंत्र को पूर्वी क्षेत्र (अरुणाचल प्रदेश) में भी मजबूती से लागू किया जा रहा है।
वर्तमान में, भारतीय सेना की एक बड़ी संख्या में टुकड़ियां सीमा पर तैनात हैं ताकि किसी भी संभावित उकसावे या तनाव को रोका जा सके। यह सतर्कता राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आगामी BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत यात्रा के दौरान भी बनी रहेगी।
| क्षेत्र (Sector) | मुख्य बैठक बिंदु | उद्देश्य |
|---|---|---|
| पश्चिमी क्षेत्र (लद्दाख) | चुशुल-मोल्डो | 2020 गतिरोध का समाधान |
| पूर्वी क्षेत्र (अरुणाचल) | वाचा-दामई | ताक्सिंग क्षेत्र तनाव कम करना |
Frequently Asked Questions
1. यह सैन्य वार्ता कहाँ आयोजित की गई थी?
यह वार्ता अरुणाचल प्रदेश के वाचा (भारतीय पक्ष) और दामई (चीनी पक्ष) में आयोजित की गई थी।
2. इस बैठक का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह बैठक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 12-13 सितंबर को होने वाली संभावित भारत यात्रा और BRICS शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुई है।