नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की 44वीं पुण्यतिथि पर उनके ऐतिहासिक वीडियो साझा कर उनकी राजनीतिक विरासत को पुनर्जीवित किया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उन्हें जम्मू-कश्मीर के इतिहास का एक अमर व्यक्तित्व बताया।
- नेशनल कॉन्फ्रेंस ने शेख अब्दुल्ला की 44वीं पुण्यतिथि पर विशेष आर्काइवल वीडियो जारी किए।
- मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने श्रीनगर के निगीन कब्रिस्तान में श्रद्धांजलि अर्पित की।
- पार्टी ने शेख अब्दुल्ला के धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण और ऐतिहासिक भूमि सुधार अधिनियम पर जोर दिया।
जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने अपने संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की 44वीं पुण्यतिथि को एक अलग अंदाज में मनाया। पार्टी ने किसी बड़े नीतिगत बयान के बजाय, डिजिटल माध्यमों और पुराने आर्काइवल वीडियो के जरिए 'शेर-ए-कश्मीर' की राजनीतिक विरासत को नई पीढ़ी के सामने रखने का प्रयास किया।
श्रीनगर के निगीन स्थित कब्रिस्तान में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की मजार पर हाजिरी दी और विशेष दुआएं मांगीं। इस अवसर पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे, जिन्होंने 'बाबा-ए-कौम' को याद किया।
विरासत का पुनरुद्धार
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भावुक होते हुए कहा कि शेख साहब एक ऐसे शिखर पुरुष थे जिनका स्थान जम्मू-कश्मीर के इतिहास और सामूहिक स्मृति में शाश्वत है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के जरिए बताया कि कैसे शेख अब्दुल्ला का जीवन जम्मू-कश्मीर के लोगों की गरिमा, अधिकारों और आकांक्षाओं के लिए समर्पित था।
इन वीडियो में एक दुर्लभ दृश्य भी सामने आया, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी को शोक संतप्त अब्दुल्ला परिवार से मिलने और शेख साहब की पत्नी को सांत्वना देते हुए देखा जा सकता है। यह वीडियो उस दौर के जटिल लेकिन महत्वपूर्ण राजनीतिक संबंधों को दर्शाता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, चुनाव और राजनीतिक अस्थिरता के दौर में NC का यह कदम केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि अपनी वैचारिक जड़ों की ओर लौटने का प्रयास है। आर्काइवल फुटेज का उपयोग करके पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि जम्मू-कश्मीर की असली पहचान और अधिकार शेख अब्दुल्ला के विजन में निहित हैं।
शेख अब्दुल्ला का राजनीतिक सफर केंद्र के साथ उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन उनकी प्राथमिकता हमेशा जम्मू-कश्मीर के लोगों का सशक्तिकरण रही।
जम्मू में मंत्री सतीश शर्मा ने शेख अब्दुल्ला द्वारा शुरू किए गए ऐतिहासिक 'भूमि सुधार अधिनियम' (Land Reforms Act) का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस सुधार ने किसानों को सशक्त बनाया और राज्य के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को पूरी तरह बदल दिया, जिससे किसान अपनी नियति के खुद मालिक बन सके।
ऐतिहासिक रूप से, शेख अब्दुल्ला को 1953 में सत्ता से हटाकर गिरफ्तार किया गया और राज्य से बाहर भेज दिया गया था। तब से लेकर आज तक, उन्होंने और उनके उत्तराधिकारियों ने 1953 से पहले की राजनीतिक स्थिति की बहाली के लिए संघर्ष किया है।
Frequently Asked Questions
1. शेख अब्दुल्ला का सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्या था?
उनका सबसे बड़ा योगदान 'भूमि सुधार अधिनियम' था, जिसने जमींदारी प्रथा को खत्म कर भूमिहीन किसानों को मालिकाना हक दिया।
2. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पुण्यतिथि पर क्या विशेष किया?
NC ने शेख अब्दुल्ला की राजनीतिक यात्रा और उनके प्रभाव को दिखाने वाले दुर्लभ आर्काइवल वीडियो स्ट्रीम किए।