राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने म्यांमार में सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षित करने के आरोपी एक अमेरिकी और छह यूक्रेनियन नागरिकों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें गंभीर UAPA धाराओं को हटा दिया गया है। अब आरोपियों पर केवल आव्रजन कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

  • NIA ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक और 6 यूक्रेनियन नागरिकों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की।
  • शुरुआती आतंकवाद संबंधी UAPA आरोपों को हटाकर अब केवल आव्रजन अधिनियम (Immigration Act) की धाराएं लगाई गई हैं।
  • यह घटनाक्रम अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री के बीच चर्चा के बाद सामने आया है।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक चौंकाने वाला मोड़ लेते हुए, म्यांमार में भारत-विरोधी सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने के आरोपी छह यूक्रेनियन नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक के खिलाफ अपनी पहली चार्जशीट में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धाराओं को शामिल नहीं किया है। मंगलवार को एक विशेष अदालत में दाखिल इस चार्जशीट में आरोपियों पर केवल आव्रजन कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक को 13 मार्च को कोलकाता हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। वहीं, छह यूक्रेनियन नागरिकों—हुरबा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमनोव्स्की, स्टेफनकिव मारियन, होंचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर—को दिल्ली और लखनऊ हवाई अड्डों से हिरासत में लिया गया था। NIA का आरोप था कि ये विदेशी पर्यटक वीजा पर भारत आए और बिना अनुमति के पूर्वोत्तर राज्यों के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार में दाखिल हुए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस मामले में UAPA धाराओं का हटना कूटनीतिक दबाव का संकेत हो सकता है। यह घटनाक्रम अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर द्वारा विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ की गई चर्चाओं के कुछ ही हफ्तों बाद आया है। यह दर्शाता है कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मामलों में कानूनी कार्रवाई और द्विपक्षीय संबंधों के बीच एक बारीक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

"जब जांच के 180 दिनों बाद भी गंभीर आतंकवाद के सबूत नहीं मिलते और केवल आव्रजन उल्लंघन बचता है, तो यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों पर गंभीर सवाल उठाता है।"

एजेंसी के विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी ने अदालत को सूचित किया कि जांच अभी भी जारी है और यदि भविष्य में आवश्यक हुआ, तो एक पूरक (supplementary) चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। हालांकि, वर्तमान में केवल आव्रजन और विदेशियों अधिनियम, 2025 की धारा 21 और 23 लागू की गई हैं, जो कि शमनीय (compoundable) अपराध हैं।

आरोपियों के वकीलों, रोहित दंड्रियाल और रोहित गौर ने इस बात पर आपत्ति जताई कि उनके मुवक्किल को 180 दिनों तक जेल में रखा गया, जबकि अंततः उन पर कोई गंभीर आरोप नहीं पाया गया। उन्होंने तर्क दिया कि हिरासत को सजा के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

क्या आप जानते हैं? UAPA एक अत्यंत कठोर कानून है जिसके तहत जमानत मिलना बहुत कठिन होता है, जबकि आव्रजन अधिनियम के तहत अपराधों का निपटारा प्रशासनिक स्तर पर भी संभव है।

Frequently Asked Questions

1. आरोपियों पर मूल रूप से क्या आरोप थे?
उन पर आरोप था कि उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के माध्यम से अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश किया और वहां जातीय सशस्त्र संगठनों को प्रशिक्षण दिया।

2. क्या अब ये आरोपी रिहा हो जाएंगे?
चूंकि अब केवल आव्रजन अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं, जो कि शमनीय हैं, इसलिए उनकी कानूनी स्थिति अब काफी कमजोर हो गई है और रिहाई की संभावना बढ़ गई है।