नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने तमिलनाडु के स्मार्ट सिटी मिशन में भारी भ्रष्टाचार और फंड के दुरुपयोग को उजागर किया है, जिसमें लग्जरी कारों और महंगे टीवी की खरीद शामिल है।
- ₹10,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स में नियमों का गंभीर उल्लंघन और फंड का डायवर्जन पाया गया।
- बिना किसी योजना के ₹623 करोड़ की 44 परियोजनाएं शुरू की गईं।
- स्मार्ट सिटी फंड का उपयोग लग्जरी कारों, 110 इंच के टीवी और सामान्य वेतन भुगतान के लिए किया गया।
- SPV के गठन में कंपनी एक्ट के नियमों की अनदेखी की गई।
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने तमिलनाडु में केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी मिशन के ऑडिट में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। साल 2015 से 2023 के बीच ₹10,000 करोड़ की परियोजनाओं की जांच में यह पाया गया कि नियमों को ताक पर रखकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 52 ऐसी परियोजनाएं सामने आई हैं जिनकी लागत ₹1,602.2 करोड़ है और जिनमें मंत्रालय की मंजूरी के बिना मनमाने बदलाव किए गए।
सबसे गंभीर मामला उन 44 परियोजनाओं का है, जिन्हें बिना किसी ठोस योजना या ब्लूप्रिंट के शुरू कर दिया गया। इन योजनाओं पर कुल ₹623.86 करोड़ खर्च किए गए। ऑडिट में यह भी पाया गया कि ₹184.71 करोड़ की 21 परियोजनाएं निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र के बाहर बनाई गईं, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। तिरुनेलवेली शहर इस अनियमितता का केंद्र रहा, जहां ₹314.62 करोड़ के 15 प्रोजेक्ट बिना किसी मंजूरी के शुरू किए गए।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह मामला केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संस्थागत भ्रष्टाचार का संकेत है। जब बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवंटित फंड का उपयोग लग्जरी सामानों और वेतन भुगतान के लिए किया जाता है, तो यह न केवल शहरी विकास को बाधित करता है बल्कि करदाताओं के विश्वास को भी तोड़ता है। यह दर्शाता है कि निगरानी तंत्र (Monitoring Mechanism) पूरी तरह विफल रहा है।
रिपोर्ट में विलासिता पर खर्च का विस्तृत विवरण दिया गया है। छह शहरों ने ₹23.83 करोड़ का उपयोग उन मदों में किया जिनकी अनुमति नहीं थी। इसमें 110 इंच के विशाल टीवी की खरीद, लग्जरी गाड़ियां, कंप्यूटर और कॉन्फ्रेंस हॉल की मरम्मत शामिल है। चेन्नई ने सरकारी विज्ञापनों पर ₹66.58 लाख और बाहरी सलाहकारों पर ₹18.44 लाख खर्च किए, जबकि इरोड और सेलम ने सीवरेज कर्मचारियों के वेतन के लिए फंड का डायवर्जन किया।
स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से जीवन स्तर सुधारना था, लेकिन तमिलनाडु में इसे 'पर्सनल शॉपिंग लिस्ट' की तरह इस्तेमाल किया गया।
प्रशासनिक ढांचे में भी बड़ी खामियां पाई गईं। कंपनी एक्ट 2013 के तहत स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के लिए ₹200 करोड़ की पूंजी आवश्यक है, लेकिन इन्हें मात्र ₹10 लाख में बना दिया गया। इसके अलावा, चेन्नई को छोड़कर किसी भी SPV में पूर्णकालिक CEO नहीं था, जिससे नगर आयुक्तों के पास अत्यधिक शक्ति केंद्रित हो गई और 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) की स्थिति पैदा हुई।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: CAG रिपोर्ट में सबसे बड़ी वित्तीय गड़बड़ी क्या पाई गई?
उत्तर: सबसे बड़ी गड़बड़ी ₹10,000 करोड़ के फंड के प्रबंधन में पाई गई, जिसमें बिना योजना के प्रोजेक्ट शुरू करना और फंड को निजी विलासिता की वस्तुओं पर खर्च करना शामिल है।
उत्तर: कंपनी एक्ट 2013 के अनुसार ₹200 करोड़ की पूंजी अनिवार्य थी, लेकिन तमिलनाडु में इन्हें केवल ₹10 लाख की पूंजी के साथ गठित किया गया।