अमेरिका के 20 राज्यों और वाशिंगटन डीसी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सरकार ने वन्यजीव संरक्षण कानूनों को अवैध रूप से कमजोर किया है।
- 20 डेमोक्रेटिक राज्यों और वाशिंगटन डीसी ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ दो बड़े मुकदमे दायर किए हैं।
- आरोप है कि सरकार ने 1973 के 'लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम' (ESA) की परिभाषा को संकुचित कर दिया है।
- नया नियम खनन और तेल ड्रिलिंग जैसी गतिविधियों को संवेदनशील आवासों में आसान बना सकता है।
- प्रशासन का तर्क है कि वे केवल कांग्रेस के मूल इरादों को लागू कर रहे हैं और 'नियामक अतिरेक' को रोक रहे हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका में एक गंभीर कानूनी टकराव शुरू हो गया है। 20 डेमोक्रेटिक-नेतृत्व वाले राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमे दायर किए हैं। यह कानूनी कार्रवाई आंतरिक विभाग (Department of Interior) और वाणिज्य विभाग द्वारा हाल ही में घोषित उन नियमों के जवाब में आई है, जो लुप्तप्राय प्रजातियों के आवासों में औद्योगिक विकास का रास्ता खोलते हैं।
वाशिंगटन राज्य के अटॉर्नी जनरल निक ब्राउन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कड़े शब्दों में कहा कि ट्रंप प्रशासन कानून, कांग्रेस की इच्छा और उन लोगों की इच्छा को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है जो वन्यजीव संरक्षण का समर्थन करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का दृष्टिकोण 'संरक्षण' के बजाय 'शोषण' का है।
कानूनी विवाद का मुख्य बिंदु: 'नुकसान' की परिभाषा
पहले मुकदमे का मुख्य केंद्र 1973 के लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम (Endangered Species Act) में 'नुकसान' (Harm) शब्द की व्याख्या है। ऐतिहासिक रूप से, 'नुकसान' में उन प्रजातियों के प्राकृतिक आवासों को होने वाले खतरे भी शामिल थे। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के नए नियमों ने इस परिभाषा को इतना सीमित कर दिया है कि अब खनन और तेल ड्रिलिंग जैसी गतिविधियाँ तब तक वैध मानी जा सकती हैं जब तक कि वे सीधे तौर पर किसी जानवर को मारने के इरादे से न की गई हों।
"पर्यावरण संरक्षण को हटाना केवल आर्थिक लाभ नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अपरिवर्तनीय पारिस्थितिक आपदा को निमंत्रण देना है।"
नियमों में अन्य विवादास्पद बदलाव
दूसरे मुकदमे में दो और नियमों को चुनौती दी गई है। पहला नियम यह है कि नई खतरे में पड़ी प्रजातियों को तब तक व्यापक सुरक्षा नहीं मिलेगी जब तक कि अमेरिकी मछली और वन्यजीव सेवा विशिष्ट नियम नहीं बनाती। दूसरा विवादास्पद नियम सरकार को 'महत्वपूर्ण आवास' (Critical Habitats) घोषित करने से पहले निजी कंपनियों की आपत्तियों पर विचार करने के लिए मजबूर करता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल वन्यजीवों के बारे में नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी राजनीति में 'पर्यावरण बनाम अर्थव्यवस्था' के गहरे विभाजन को दर्शाता है। ट्रंप का "Drill, baby, drill" नारा स्पष्ट करता है कि उनका प्राथमिक लक्ष्य ऊर्जा स्वतंत्रता और औद्योगिक विकास है, भले ही इसके लिए दशकों पुराने संरक्षण कानूनों की बलि देनी पड़े।
| विशेषता | पुराना दृष्टिकोण (ESA 1973) | ट्रंप प्रशासन का नया नियम |
|---|---|---|
| 'नुकसान' की परिभाषा | आवास विनाश को भी नुकसान माना जाता था | केवल प्रत्यक्ष और जानबूझकर किए गए हमले को नुकसान माना जाता है |
| निजी क्षेत्र की भूमिका | संरक्षण प्राथमिकता पर था | आवास घोषित करने से पहले कॉर्पोरेट आपत्तियों पर विचार |
| सुरक्षा का दायरा | व्यापक और तत्काल सुरक्षा | प्रजाति-विशिष्ट नियमों तक सीमित |
ऐतिहासिक रूप से, 1973 के कानून को कोंडोर, ग्रिज़ली भालू और हम्पबैक व्हेल जैसी प्रजातियों की आबादी को बहाल करने का श्रेय दिया जाता है। आलोचकों का कहना है कि इन बदलावों से कई प्रजातियां स्थायी रूप से विलुप्त हो सकती हैं।
Frequently Asked Questions
1. लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम (ESA) क्या है?
यह 1973 का एक अमेरिकी कानून है जिसका उद्देश्य उन पौधों और जानवरों की रक्षा करना है जो विलुप्त होने के खतरे में हैं।
2. ट्रंप प्रशासन इन बदलावों का समर्थन क्यों कर रहा है?
प्रशासन का तर्क है कि पुराने नियम बहुत सख्त थे और वे आर्थिक विकास और ऊर्जा उत्पादन (जैसे तेल और गैस) को प्राथमिकता देना चाहते हैं।